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10 माह से कम कार्यकाल में सरपंच  दीपिका ठाकुर की दो मानवीय पहलें बनी चर्चा का विषय

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बोड़ला : ग्राम पंचायत मड़मड़ा, तहसील बोड़ला, जिला कबीरधाम की सरपंच  दीपिका ठाकुर पति पप्पू ठाकुर ने अपने अल्प कार्यकाल में यह सिद्ध कर दिया है कि जनप्रतिनिधि होना केवल पद धारण करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी है। शपथ ग्रहण समारोह के समय उन्होंने ग्रामवासियों के समक्ष यह बात कही थी कि वे अपने कार्यकाल में दुख और शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यक्तिगत स्तर पर जिम्मेदारी निभाएंगी। आज उनके 10 माह से भी कम कार्यकाल में यह कथन केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यवहार में उतरता हुआ दिखाई दे रहा है।

दुख की घड़ी में पंचायत नहीं, सरपंच स्वयं बनीं सहारा

पिछले कुछ महीनों में ग्राम पंचायत मड़मड़ा के कई परिवारों को अपने किसी प्रियजन को खोने का गहरा दुख सहना पड़ा। किसी परिवार ने घर का मुखिया खोया, तो किसी ने परिवार का कमाने वाला सदस्य। ऐसे समय में परिवार पर भावनात्मक के साथ-साथ आर्थिक संकट भी आ जाता है। अंतिम संस्कार, धार्मिक क्रियाकर्म और आवश्यक खर्च एक साथ सामने आ जाते हैं, जिससे साधारण ग्रामीण परिवार बुरी तरह प्रभावित होता है इन परिस्थितियों को समझते हुए सरपंच  दीपिका ठाकुर ने पंचायत निधि का उपयोग किए बिना, अपने निजी पैसों से मृतक परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया। अब तक उनके द्वारा 25 से अधिक मृतक परिवारों को ₹5,000–₹5,000 की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सहायता किसी योजना, फाइल या औपचारिक प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और व्यक्तिगत संकल्प से दी गई है। दुख की घड़ी में मिला यह सहयोग पीड़ित परिवारों के लिए बड़ा संबल साबित हुआ है।

बच्चों की पढ़ाई के लिए निजी खर्च से दो शिक्षक

शपथ ग्रहण के समय सरपंच ने यह भी कहा था कि यदि ग्राम की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी, तो वे इसे केवल शासन पर नहीं छोड़ेंगी। ग्राम की प्राथमिक शाला में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।

इस स्थिति को देखते हुए सरपंच  दीपिका ठाकुर ने अपने निजी खर्च से दो शिक्षकों की व्यवस्था की। इसके अंतर्गत प्रतिमाह कुल ₹8,000 का मानदेय स्वयं वहन किया जा रहा है, जिसमें

दोनों शिक्षकों को ₹4,000–₹4,000 प्रतिमाह दिया जा रहा है। इस पहल से विद्यालय में पढ़ाई नियमित हुई है, बच्चों की उपस्थिति में सुधार आया है और अभिभावकों में संतोष देखने को मिल रहा है।

निजी पैसों से सार्वजनिक सेवा,मृतक परिवारों को सहायता हो या बच्चों की शिक्षा के लिए शिक्षक व्यवस्था—ये दोनों कार्य पूरी तरह सरपंच के निजी पैसों से किए जा रहे हैं। इनमें पंचायत निधि का कोई उपयोग नहीं किया गया है। यह पहल किसी प्रचार या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि शपथ में कही गई बातों को निभाने की सच्ची भावना से प्रेरित है।  अन्य पंचायतों के लिए संदेश,ग्राम पंचायत मड़मड़ा की यह पहल यह संदेश देती है कि पद से बड़ा कर्तव्य और वचन से बड़ा विश्वास होता है। यदि जनप्रतिनिधि चाहें, तो सीमित साधनों में भी समाज के लिए सार्थक कार्य किए जा सकते हैं।

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