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“डोंगरी पंचायत की पचरी –पहली बरसात में ही चरमराई, भ्रष्टाचार की पोल खुली”….!

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“नींव में घोटाला, दीवार में दरार – लाखों की पचरी बनी मज़ाक”…..!

कटघोरा/कोरबा:- जनपद पंचायत कटघोरा अंतर्गत ग्राम पंचायत डोंगरी में विकास कार्य के नाम पर फिर से बड़ा खेल सामने आया है। 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत “पचरी निर्माण कार्य तिलवारीपारा, अपर मोहल्ला तालाब” की हकीकत तस्वीरों और मौके की स्थिति खुद बयां कर रही है। करीब ₹2 लाख 25 हजार की लागत से बनाई गई यह पचरी अभी बरसात आने से पहले ही टूट-फूट की कगार पर खड़ी है।

कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत डोंगरी रही और लोकार्पण का श्रेय जनपद सदस्य संगीताकमल बेलदार के हिस्से आया। लेकिन लोकार्पण की चमक-दमक और फोटो सेशन के बाद जैसे ही जनता ने नज़र डाली, हकीकत सामने आ गई। दीवारों में गहरी दरारें, नींव का चरमराना और निर्माण का खोखलापन इस बात का सबूत है कि “जितनी मजबूती कागजों में दिखाई गई, जमीन पर उतनी ही कमजोरी रख दी गई।”

भ्रष्टाचार की परतें खुलीं….!

ग्रामीणों का कहना है कि इस काम में सीधा-सीधा भ्रष्टाचार हुआ है। घटिया सीमेंट, रेत और ईंटों का उपयोग कर खानापूर्ति की गई। अधिकारियों की “आंखों पर पट्टी” रही और पंचायत ने “राम भरोसे” काम पूरा कर दिया। ग्रामीण तंज कसते हैं कि “पैसा तो जनता का गया, लेकिन फायदा सिर्फ जेबें भरने वालों का हुआ।”

जनता के सवाल….!

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यदि इतने बड़े काम पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी पचरी टिकाऊ न निकली तो इसका मतलब है कि शुरू से ही खेल किया गया।

जब नींव कमजोर हो तो दीवार कब तक टिकेगी?

जब अधिकारियों की मिलीभगत हो तो जांच कौन करेगा?

जब जनप्रतिनिधि ही चुप्पी साध लें तो जनता की सुनवाई कौन करेगा?

सिर्फ नाम का विकास…

पचरी को देख कर कहा जा सकता है की यह कार्य सिर्फ नाम मात्र का है, लोकार्पण के बाद फोटो खिंचवाकर काम पूरा मान लिया गया और अब दीवारें दरककर जनता को मुँह चिढ़ा रही हैं।

विभाग की जिम्मेदारी….!

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभाग इस घटिया निर्माण पर कार्रवाई करेगा या फिर इसे भी “फाइलों की धूल” में दबा देगा? यदि तकनीकी जांच हुई तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। लेकिन अगर जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया तो यह साफ हो जाएगा कि अधिकारियों और पंचायत की मिलीभगत से जनता का पैसा डुबोया जा रहा है।

जनता की मांग…!

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि “जनता का पैसा जनता के विकास में लगे, न कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े।” उन्होंने इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

“डोंगरी पंचायत की पचरी अब सिर्फ सीमेंट-ईंट का ढांचा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का आईना बन चुकी है — जो बता रही है कि यहां विकास से ज्यादा जेबें भरने का खेल खेला जा रहा है।”

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