
कोरबा/पोंडी उपरोड़ा :- शासन की महत्वाकांक्षी मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक, सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे भूखे पेट पढ़ाई करने को मजबूर न हों। लेकिन पोंडी उपरोड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला सिंघिया की ताज़ा तस्वीरों ने इस योजना की सच्चाई की पोल खोलकर रख दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि मासूम बच्चों का भोजन लकड़ी के चूल्हे पर घने धुएं के बीच पकाया जा रहा है।
यह दृश्य न केवल मिड-डे मील योजना की विफलता को उजागर करता है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की गवाही भी देता है।
ग्रामीणों का गुस्सा – गैस सिलेंडर कहाँ गायब?
गांव के ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा हर स्कूल को गैस सिलेंडर और चूल्हा उपलब्ध कराया गया है, ताकि बच्चों को लकड़ी के धुएं से होने वाले खतरे से बचाया जा सके। लेकिन सिंघिया स्कूल में गैस सिलेंडर नदारद है।
रसोई में धुएं का आलम यह है कि सांस लेने में तकलीफ होती है, जबकि मासूम बच्चे वही खाना खाने को मजबूर हैं।
सवाल तो बनता है:-“जब सरकार लाखों रुपए इस योजना पर खर्च कर रही है,तो फिर बच्चों को धुएं में पकाया हुआ खाना क्यों खिलाया जा रहा है? क्या मासूमों का स्वास्थ्य प्रशासन की नजर में कोई मायने नहीं रखता?”
नियमों की उड़ती धज्जियां:-मिड-डे मील योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूलों में भोजन केवल गैस चूल्हे पर ही पकाया जाएगा जिससे बच्चों को गरमा गरम खाना मिल सके जिससे बच्चों स्वास्थ्य अच्छा रहे यही सोच कर सरकार ने इस योजना का शुभारम्भ किया गया है!
लकड़ी के चूल्हे का उपयोग पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि यह –स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है , सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है,और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है!साफ है कि सिंघिया स्कूल में यह निर्देश हवा में उड़ा दिए गए हैं।
जिम्मेदार कौन – प्रशासन मौन क्यों?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?
क्या स्कूल के शिक्षकों ने गैस सिलेंडर की व्यवस्था नहीं की?
क्या विभागीय अधिकारी कभी औचक निरीक्षण पर नहीं आते?
और जब तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, तब भी प्रशासन मौन क्यों है?
यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।





