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उप मुख्यमंत्री पहुंचे पहाड़ों के पठार पर बैगा आदिवासियों से संवाद करने, समस्याओं का लगा अंबार

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@अजय जांगड़े
कवर्धा , उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव आदिवासी जन वन अधिकार मंच द्वारा झूमर गांव में आयोजित बैगा संवाद सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन में उन्होंने बैगाओ की विभिन्न समस्याओं को उनकी ही जुबानी सुना और त्वरित कार्यवाही करने हेतु प्रशासन को निर्देश दिया। टी एस सिंहदेव बैगा मुखिया द्वारा उठाई गई समस्याओं पर कहा कि वन अधिकार को लेकर विभिन्न किस्म की परेशानियों से मैं अवगत हुआ हूं और बता दूं कि वन अधिकार के दावे कभी भी लगाए जा सकते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में मुझे जाने का अवसर मिलता है लेकिन यहां आकर समझ में आया कि अन्य क्षेत्रों से इस अंचल में ज्यादा बड़ी और कठिन समस्याएं हैं। यहा पर जो आवेदन पत्र हुआ है उसे उड़न खटोला में भी नही ले जाया जा सकता । उन्होंने जन समुदाय को आश्वास किया है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र की समस्याओं को शिविर लगाकर उनका समाधान किया जाएगा। सम्मेलन में पंडरिया और बोडला तहसील के लगभग 4000 बैगाओं ने शिरकत की। बैगा समुदाय के अलावा अन्य वर्ग से भी भारी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल रहे। कार्यक्रम में बैगा आदिवासियों के अलावा अर्जुन तिवारी , पारस बंगानी, अमित डडसेना, सहित अन्य लोग मौजूद थे ।
प्रतिनिधि मंडल के मांग पर झूमर आया टी एस सिंह देव

 कुछ माह पहले बैगाओं का 42 सदस्य प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री से रायपुर स्थित उनके निवास पर समस्याओं को लेकर मिला था। उस समय उप मुख्यमंत्री ने बैगाओं को आश्वासन दिया था कि वें किसी बैगा बाहुल्य गांव में जाकर उनकी समस्याओं को सुनेंगे और उसका निदान करने का प्रयास करेंगे। इसी परिप्रेक्ष्य में झूमर में पहला बैगा संवाद सम्मेलन का आयोजन हुआ।
सम्मेलन में मन्ना बैगा ने निजी व्यक्तिगत वन अधिकार प्राप्त होने में आ रही कठिनाइयों का जिक्र करते कहा कि बैगांचल में हजारों दावेदार में विभिन्न प्रकार की बाधाओं के कारण अब तक दावा नहीं कर पाए हैं। जिन बैगाओं को पट्टा मिला है वह भी उनकी काबिज जमीन के छोटे से हिस्से का है। कई बैगा परिवारों के दावा विभिन्न स्तर पर अटके हुए हैं उन्होंने बताया कि पंचायत सचिव ऊपर से आदेश नहीं है कहकर दावा नहीं ले रहे हैं। सचिवों का कहना है कि जब तक ऊपर से आदेश नहीं आएंगे सामान्य ग्राम सभा में वन अधिकार का मामला नहीं लेंगे और ना ही विशेष ग्राम सभा की इजाजत देंगे। मन्ना बैगा ने इस संदर्भ मे ग्राम सभा स्तर पर वन अधिकार समिति का गठन और उसकी मान्यता , विशेष ग्राम सभा का प्रावधान , 
जिन्हें कम जमीन का पट्टा मिला है उन्हें शेष जमीन का दावा करने का प्रावधान, पंचायत सचिवों को निर्देश हो कि नए दावों को वें ले और आगे स्तर पर प्रेषित करें का मांग किया । 
गोंठू बैगा ने कहा कि पूरे क्षेत्र में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन अधिकार नहीं मिला है। जो मिला है उसमें एक छोटे से सामुदायिक वन के हिस्से पर पहुंच और उपयोग का अधिकार प्राप्त हुआ है और वह भी ज्यादातर जगहों पर ग्राम सभा के स्थान पर संयुक्त वन प्रबंधन समिति को दे दिए गए हैं। उन्होंने वन अधिकार प्राप्त करने के लिए वन अधिकार समिति का गठन गांव, टोला स्तर पर हो ना कि पंचायत स्तर पर , वन अधिकार पर विशेष ग्राम सभा करने का प्रावधान , शासन द्वारा निस्तार पत्रक जैसे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना , जीपीएस की अनिवार्यता को खत्म करना या प्रशासन द्वारा जीपीएस करने की व्यवस्था करना, संयुक्त वन प्रबंधन के नाम जारी सामुदायिक पट्टे को निरस्त करना और अभियान चला कर वन अधिकार कानून के तहत 3 (1) के प्रावधान अनुसार वन प्रबंधन अधिकार पत्र देना चाहिए उन्होंने उपमुख्यमंत्री से मांग कि वे हैवीटाइट राइट्स ( बैगाओ के पर्यावास का अधिकार) की प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए जिला स्तरीय समिति को हीं निर्देशित करें । 
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर बात करते हुए दशमिन बाई बैगा ने मांग किया कि सांप बिच्छू कुत्ता काटने पर इलाज की दवाई प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तथा मितानिनों के पास उपलब्ध हो। गांव में डॉक्टर नियमित तौर पर आए जाए। जहां रोड नहीं वहां से मरीज लाने की विशेष व्यवस्था हो जो माह के अंतराल पर गांव में स्वास्थ्य शिविर लगे। आदिवासी जन वन अधिकार मंच की संयोजिका ने बताया कि बैग क्षेत्र में कुपोषण की विषम समस्या है और एक प्रामाणिक अध्ययन के अनुसार बड़ी संख्या में बैगा स्त्री पुरुष और बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित है। शासन को बैगा जनजाति के लिए विशेष व्यवस्था करते हुए पौष्टिक खाद्य सामग्री जैसे सोया वटी, फल्ली दाना, दालें उपलब्ध कराना चाहिए। पानी की समस्या पर बोलते हुए एनिमा बनर्जी ने बताया कि कई गांव में पानी की विकराल समस्या है। अभियान के तौर पर हैंडपंप लगवाया जाए और दलदली तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में पेयजल की समस्या का परियोजना बनाकर और उनका क्रियान्वय कर स्थाई समाधान करने की आवश्यकता मांग की । दलदली क्षेत्र से आए लमतू बैगा ने बॉक्साइट खनन से विस्थापित हुए लोगों को उचित मुआवजा तथा उचित पुनर्वास की मांग रखी। उन्होंने जिला खनिज न्यास तथा सी एस आर के पैसों का खनन प्रभावित क्षेत्रों तथा लोगों में उचित तथा कारगर ढंग से खर्च करने की व्यवस्था पर बनाने पर जोर दिया। बिरजू बैगा में आवागमन की घनघोर समस्या पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आवागमन की समस्या की वजह से स्वास्थ्य सुविधा लेने में अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही संग्रहित वनोपज को बहुत ही कम कीमत पर बिचौलियों को बेचना की मजबूरियों का जिक्र किया।
पुसूराम बैगा ने बैगा विकास प्राधिकरण को और भी सबल बनाने की मांग की। उन्होंने कहा की आबादी के अनुपात में प्राधिकरण का बजट बहुत कम है, और योजना भी ऊपर से बनकर आती है। बजट में बढ़ोतरी करनी चाहिए और वह गांव से सलाह लेकर प्लान बनवाना चाहिए। लालजू बैगा ने मांग रखी कि मनरेगा की भूमि मरम्मत कार्य में सीढ़ी नुमा खेत बनाने का प्रावधान भी होना चाहिए। बैगा समुदाय के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी मछिया ने बताया कि कई बैगा परिवारों की पूर्व से काबिज तथा पट्टा वाली जमीन को दबंगों ने कब्जा कर रखा है। उन्होंने मांग की उचित कार्रवाई कर बैगा परिवारों को उनकी जमीन वापस कराया जाए। उन्होंने कहा कि भैसा डबरा, अमली टोला, बदना, बीजापारा, उप, दीवान पटपर, चीताडबरी, नागा डबरा जैसे अनेक गांवों में लगभग 500 से भी ज्यादा बैगा परिवारों की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। अमनिया में बैगाओं की शमशान भूमि पर तक कब्जा कर रखा है। उन्होंने यह भी बताया कि कई गांव में एक ही जमीन पर बैगा और अन्य समुदाय के नाम पर बना दिए गए हैं। सहेत्तरसिंह धुर्वे ने 12 गांव में बिजली लगाने और 3 गांव में स्कूल भवन बनवाने की मांग रखी। सम्मेलन में उपस्थित मुद्दों पर आवेदन भी उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव को सौंपे गए हैं जिन पर उचित कार्रवाई करने का उन्होंने आश्वासन दिया।

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