hindmedianews
Breaking News
अन्यछत्तीसगढ़देश-विदेशब्रेकिंग न्यूज़शिक्षा

प्रेरक प्रसंग ~ अपनी क्षमता को पहचानिए

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow
एक पत्थर काटने वाला मजदूर अपनी दिहाड़ी करके अपना समय बिता रहा था, पर मन ही मन असंतुष्ट था।
एक दिन ऐसे ही उसे लगा कि उसको कोई शक्ति प्राप्त हो गयी है जिससे उसकी सारी इच्छा पूरी हो सकती है।

शाम को एक व्यापारी के बड़े घर के सामने से गुजरते हुए उसने व्यापारी के ठाट बाठ देखे, गाड़ी घोड़ा, घर की सजावट देखी।

अब उसके मन में इच्छा हुयी कि क्या पत्थर काटते काटते जिन्दगी गुजारनी है। क्यों न वो व्यापारी हो जाए।

अचानक उसकी इच्छा पूरी हो गयी, धन प्राप्त हो गया, नया घर, नयी गाडी, सेवक सेविका, मतलब पूरा ठाटबाट।
एक दिन एक बड़ा सेनापति उसके सामने से निकला अपने सैनिको के साथ, उसने देखा कि क्या बात है ?
कोई कितना भी धनी क्यों न हो, इस सेनापति के आगे सर झुकाता है। मुझे सेनापति बनना है।
बस शक्ति से वो सेनापति बन गया। अब वो गर्व से बीच में बने सिंहासन पर बैठ सकता था, जनता उसके सामने दबती थी। सैनिको को वो मनचाही का आदेश दे सकता था।
पर एक दिन तपती धुप में उसे गरमी के कारण उठना पडा, क्रोध से उसने सूर्य को देखा। पर सूर्य पर उसका कोई प्रभाव नहीं पडा, वो मस्ती से चमकता रहा।
ये देखकर उसके मन में आया, अरे सूर्य तो सेनापति से भी ज्यादा ताकतवर है, देखो इस पर कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है।
उसने इच्छा की कि वो सूर्य बन जाए। देखते ही देखते वो सूर्य बन गया।
अब सूर्य बनकर उसकी मनमानी चलने लगी, अपनी तपन से उसने संसार को बेहाल कर दिया।
किसानो की फसल तक जल गयी, इसको देख कर उसे अपनी शक्ति का अहसास होता रहा और वो प्रसन्न हो गया।
पर अचानक एक दिन एक बादल का टुकडा आकर उसके और धरती के बीच में खडा हो गया।
ओह ये क्या, एक बादल का टुकडा सूर्य की शक्ति से बड़ा है, क्यों न मैं बादल बन जाऊं। अब वो बादल बन गया।

बादल बन कर जोर से गरज कर वो अपने को संतुष्ट समझता रहा। जोर से बरसात भी करने लगा।

अचानक वायु का झोंका आया और उसको इधर से उधर धकेलने लगा, अरे ये क्या हवा ज्यादा शक्तिशाली, क्यों न मैं हवा बन जाऊं।
बन गया वो हवा। हवा बन कर फटाफट पृथिवी का चक्कर लगाने लगा। पर फिर गड़बड़ हो गयी, एक पत्थर सामने आ गया।
उसको वो डिगा नहीं पाया। सोचा चलो पत्थर शक्तिशाली है मैं पत्थर बन जाता हूँ। बन गया पत्थर।
पर ये भी ज्यादा देर नहीं चल पाया। क्योंकि एक पत्थर काटने वाला आया और उसे काटने लगा।
फिर सोच में पड़ गया कि ओह पत्थर काटने वाला ज्यादा शक्तिशाली है।

ओह यह मैंने क्या किया। मैं तो पत्थर काटने वाला ही था !

इतनी देर में उसकी नींद खुल गयी और स्वप्न भंग हो गया। पर फर्क था – वो अपने से संतुष्ट था।

शिक्षा:-
हमें अपने अन्दर की शक्ति और क्षमता का पता नहीं होता, और जो किसी काम के नहीं दिखाई देते, वही किसी न किसी काम के जरूर होते हैं। अपनी क्षमता को पहचानिए।

संबंधित पोस्ट

समावेशी शिक्षा पर राज्य स्तरीय सेमिनार का आयोजन

hindmedianews

Chunesh Sahu

समर्थन मूल्य पर कोदो, कुटकी, रागी खरीदी का मैदानी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार करें कुरूद में कृष्ण कुंज विकसित करने कल तक मलबा हटाने के कलेक्टर श्री पी.एस.एल्मा ने दिए निर्देश समय सीमा की बैठक में

Chunesh Sahu

शासन की आत्मसमर्पित नीति से प्रभावित होकर महिला ACM नक्सली ने किया आत्मसमर्पण

hindmedianews

52 पत्ती ताश से रूपये पैसे का दांव लगाकर जुआ खेलने वाले 10 जुआड़ियानों के विरूद्ध जुआ एक्ट एवं पृथक से प्रतिबंधात्मक कार्यवाही

rakeshbhaskar

गोबरा-नवापारा से बड़ी खबर सफाई कर्मचारी से पुलिस की मारपीट का आरोप, हाथ फ्रैक्चर होने की बात; कर्मचारियों में आक्रोश, थाने का घेराव

Sakshi Bansod