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बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में ईसाई समाज द्वारा नए धार्मिक स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के विरोध में विशाल एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित

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बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में ईसाई समाज द्वारा नए धार्मिक स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के विरोध में विशाल एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान 50,000 से अधिक लोग सड़कों पर उतरे और कानून के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

 

रैली का शुभारंभ सिटी ग्राउंड से हुआ, जो पूरे जगदलपुर शहर का भ्रमण करते हुए बस्तर संभाग कमिश्नर कार्यालय पहुंची। वहां समाज के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

 

इस प्रदर्शन में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और जशपुर सहित प्रदेश के कई जिलों के लोगों ने भाग लिया। वहीं बस्तर संभाग के कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर से भी बड़ी संख्या में लोग समर्थन देने पहुंचे।

 

प्रदर्शन के दौरान ईसाई समाज ने नए धार्मिक स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 को “काला कानून” बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करता है।

विधिक सलाहकार प्रदीप सिंह ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पुराने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 का दुरुपयोग किया जा रहा है। बिना पर्याप्त साक्ष्य के प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें न्यायालय द्वारा आरोपियों को दोषमुक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुराने कानून को और अधिक कठोर बना दिया गया है। पहले जहां 5,000 रुपये जुर्माना और 1 वर्ष की सजा का प्रावधान था, वहीं नए कानून में 7 से लेकर 10 वर्ष तक की सजा और 5 लाख से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

 

उन्होंने यह भी बताया कि कुछ प्रावधानों में पहले 2 वर्ष की सजा और 10,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर 20 वर्ष से लेकर आजीवास कारावास सजा और 25 लाख रुपये तक जुर्माना कर दिया गया है। इसके अलावा 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने,विशेष न्यायालय, विशेष न्यायाधीश और विशेष लोक अभियोजक की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सबूत का भार आरोपियों पर डाला गया है, जिसे उन्होंने गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया।

 

प्रदीप सिंह ने यह भी कहा कि नए अधिनियम में “प्रलोभन”, “सोशल मीडिया” और “महिमामंडन” जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है और इसके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

 

ईसाई समाज ने चेतावनी देते हुए महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को रद्द करने की मांग की है। साथ ही कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक एवं तेज किया जाएगा।

 

 

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