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गंगरेल बाँध प्रभावितों का अनिश्चितकालीन धरना कल से हाई कोर्ट आदेश का पांच साल बाद भी पालन नहीं, समिति ने जताया कड़ा विरोध लेकिन जोगी का असली भोगी कौन.? .? प्रभावितों पर सफेदा का कालिख पोतने वाला आखिर कौन ? ? ?

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गंगरेल बाँध प्रभावितों का अनिश्चितकालीन धरना कल से
हाई कोर्ट आदेश का पांच साल बाद भी पालन नहीं, समिति ने जताया कड़ा विरोध

लेकिन जोगी का असली भोगी कौन.? .?

प्रभावितों पर सफेदा का कालिख पोतने वाला आखिर कौन ? ? ?

चुनेश साहू । धमतरी

गंगरेल बाँध प्रभावित जनकल्याण समिति ने 14 फ़रवरी 2026 को सभी प्रभावित वासियों की सामान्य बैठक आयोजित की। इस बैठक में समिति के पदाधिकारी और प्रभावित वासी उपस्थित रहे, और गहन चर्चा हुई कि डूब प्रभावितों की लंबित मांगें, उच्च न्यायालय के आदेश और आगामी कार्य योजना किस प्रकार प्रभावी ढंग से लागू की जा सकती हैं।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 23 फ़रवरी 2026 से गांधी मैदान, धमतरी में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा जब तक प्रभावित परिवारों की न्यायोचित मांगों का समाधान नहीं किया जाता।प्रभावितों की पीड़ा और वर्षों से लंबित न्याय की मांग अब अनदेखी नहीं की जा सकती।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने दिनांक 16.12.2020 (रिट याचिका क्रमांक 5575/2008 एवं 3055/2016) में स्पष्ट निर्देश दिया था कि वर्ष 2004–2010 के मध्य भूमि प्राप्त प्रभावितों के समकक्ष अन्य पात्र प्रभावितों के दावों पर समानता के आधार पर भूमि आबंटन किया जाए। न्यायालय ने आदेश की प्राप्ति के तीन माह के भीतर सक्षम प्राधिकारी को कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।

परंतु आदेश पारित हुए लगभग पाँच वर्ष हो जाने के बावजूद, जिला प्रशासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आदेश का पालन नहीं किया गया। प्रभावित परिवार आज भी न्यायोचित भूमि और स्थायी पुनर्वास से वंचित हैं। बच्चों की शिक्षा बाधित हुई है, परिवार की आजीविका असुरक्षित है और ग्रामीण जीवन की स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।

समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उच्च न्यायालय के आदेश का पालन तत्काल नहीं किया गया, तो धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रभावित वासी और समिति के सदस्य इस आंदोलन में पूर्ण एकजुटता और दृढ़ संकल्प के साथ भाग लेंगे।

लेकिन जोगी का खेल, जहां असली जोगी भटकते और नकली भोगी मजे लेते अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर का वो पुराना किस्सा आज भी हंसाते-हंसाते रुला देता है। महानदी पर बना ये सबसे लंबा बांध सिंचाई का वरदान बना, लेकिन 50 साल बीत गए, तीन पीढ़ियां गुजर गईं, पर पुनर्वास की आस अभी भी अधर में लटकी है। असली विस्थापित, जो सालों से अदालतों के चक्कर काटते, लड़ाइयां लड़ते आए, वे आज भी सड़कों पर भटक रहे। पर जो न तो मूल जोगी थे न भोगी, वे चुपके से जोगी में घुस गए और कब्जा जमा लिया। आगे की कहानी पढ़िए अगले अंक में….


धरना प्रदर्शन में प्रमुख रूप से महाराजी राम ध्रुव, आत्मा राम ध्रुव, कृपा राम सिन्हा, सहदेव साहू, पंडोराम मंडावी, रोहित नेताम, जय कुमार सेन, गोपाल राम सिन्हा, शंभूराम, पुष्कर शोरी, उत्तम सहारे सहित सभी डूबान प्रभावित वासी उपस्थिति रहेंगी।

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