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भव्यता के दावे, हकीकत बदहाल: पानी की किल्लत,नाली किनारे जूठे पर जाने को मजबूर जन…

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घरेलू रसोई गैस के जखीरे पर प्रशासन मौन

अजय जांगड़े

कवर्धा।छत्तीसगढ़ सरकार की बहुप्रचारित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना कवर्धा में अव्यवस्थाओं और नियमों की अनदेखी का शिकार होती नजर आई। 10 फरवरी, मंगलवार को पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजित इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में जहां शासन-प्रशासन ने भव्य आयोजन का दावा किया, वहीं जमीनी हकीकत ने इन दावों की हवा निकाल दी।

कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे वर-वधू पक्ष, परिजन और आम नागरिकों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि लोगों को नाली के पास कतार में खड़े होकर पानी पीने तक की नौबत आ गई। लोगों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं, तो ऐसे में इस तरह का “शुभ आयोजन” कराना केवल दिखावा बनकर रह जाता है।

भोजन व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी, घरेलू गैस का अवैध उपयोग

कार्यक्रम की भोजन व्यवस्था में एक और गंभीर मामला सामने आया। आयोजन स्थल पर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का जखीरा खुलेआम नजर आया, जबकि इतने बड़े पैमाने पर भोजन बनाना व्यावसायिक श्रेणी में आता है। नियमों के अनुसार ऐसे कार्यों में घरेलू गैस का उपयोग प्रतिबंधित है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में घरेलू गैस आखिर कहां से और किसकी अनुमति से लाई गई? क्या इस पूरे मामले में संबंधित विभागों की भी मौन सहभागिता रही?

जवाबदेही से बचता प्रशासन

गैस के अवैध उपयोग और भोजन व्यवस्था की खामियों पर जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। उल्टा, आयोजक और भोजन व्यवस्था संचालक को खुली छूट दिए जाने के आरोप लग रहे हैं। कार्रवाई की बात आते ही अधिकारियों के “पसीना छूटना” प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

एक ओर सरकार “नेकी” और जनकल्याण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नियम-कानूनों की खुलेआम अनदेखी इस योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

सावरकर के नाम पर बने भवन में भी गंदगी

जिस भवन में कार्यक्रम आयोजित हुआ, वह वीर सावरकर के नाम पर बताया जा रहा है। लेकिन उसी भवन में साफ-सफाई का अभाव और अव्यवस्था ने सावरकर के सम्मान को ठेस पहुंचाने का काम किया। लोगों का कहना है कि यदि नाम महापुरुष का है, तो कम से कम उनके नाम से जुड़े स्थल की गरिमा तो बनाए रखी जानी चाहिए थी।

भव्यता के दावे, हकीकत बदहाल

यह सच है कि कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक संगीत, साज-सज्जा और रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न हुए और प्रशासनिक अधिकारी अगुवाई करते नजर आए। लेकिन चमक-दमक के पीछे छुपी पानी, भोजन और नियमों की बदहाली ने पूरे आयोजन पर सवालिया निशान लगा दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ,क्या घरेलू गैस के अवैध उपयोग पर कोई कार्रवाई होगी?भोजन व्यवस्था और पानी की किल्लत के लिए कौन जिम्मेदार है?क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा, या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसे संवेदनशील और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम में यदि ऐसी लापरवाही होती है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सरकारी दावों की साख पर सीधा प्रहार

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