
बिलासपुर |
सिम्स मेडिकल कॉलेज ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में नया इतिहास रचा है। 20 दिन की नवजात बच्ची, जिसकी दोनों आंखों की पलकें जन्म से आपस में जुड़ी थीं, का सफल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने उसे पूर्ण अंधेपन के खतरे से बचा लिया। बच्ची एंकी लोब्लेफेरॉन (Ankyloblepharon) नामक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी।
बच्ची की आंखें पूरी तरह बंद थीं और दुनिया देखने का कोई रास्ता नहीं था। परिवार के लिए ये चिंता और दर्द के पल थे, लेकिन सिम्स के डॉक्टरों ने अपनी दक्षता, धैर्य और विशेषज्ञता से असंभव को संभव कर दिखाया
डॉक्टरों की टीम ने दी नई रोशनी
सिम्स के नेत्र विभाग की विशेषज्ञ टीम ने लगभग डेढ़ घंटे चले जटिल ऑपरेशन के दौरान नवजात की पलकें सावधानीपूर्वक अलग कीं और आंख की प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए उपचार किया।
डॉक्टरों का कहना है कि यह केस चुनौतीपूर्ण था क्योंकि:
✔ बच्ची की उम्र मात्र 20 दिन थी
✔ बीमारी अत्यंत दुर्लभ थी
✔ पलकों में कोमल ऊतकों को बिना नुकसान पहुंचाए अलग करना आवश्यक था
परिजनों की भावुक प्रतिक्रिया
सर्जरी सफल होने के बाद बच्ची के परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक पिता ने कहा— “हमारी बेटी ने पहली बार दुनिया को देखने की शुरुआत की है… डॉक्टर हमारे लिए भगवान से कम नहीं.”
सिम्स में पहला सफल ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार यह सिम्स में इस प्रकार का पहला सफल ऑपरेशन है। चिकित्सा क्षेत्र के लिए यह उपलब्धि न सिर्फ गर्व का विषय है, बल्कि भविष्य में ऐसे दुर्लभ मामलों के उपचार का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
क्या है एंकी लोब्लेफेरॉन?
यह एक दुर्लभ जन्मजात अवस्था है , जिसमें बच्चे की दोनों पलकों के ऊतक एक-दूसरे से चिपक जाते है । समय रहते उपचार न मिलने पर बच्चा स्थायी रूप से नेत्रहीन हो सकता है
भविष्य की उम्मीद
डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को कुछ समय तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। उम्मीद है कि उपचार और देखभाल के बाद उसकी दृष्टि पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
सिम्स मेडिकल कॉलेज की इस अद्भुत उपलब्धि ने एक नन्हीं जान को अंधेपन से बचाकर नई जिंदगी दी है।





