hindmedianews
Breaking News
Raipurछत्तीसगढ़ब्रेकिंग न्यूज़राजनीती

छत्तीसगढ़ में नई जमीन गाइडलाइन पर सियासी घमासान जनता की नब्ज टटोलने में जुटी सरकार, 

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow

 

रायपुर — जमीन की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद से छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई नई भूमि दरों ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। विपक्ष ने इसे आम जनता पर ‘आर्थिक बोझ’ बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जबकि शासन ने कहा है कि नियम जनता के हितों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और जरूरत पड़ी तो पुनर्विचार भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा — “नई दरों पर विभागीय स्तर पर समीक्षा जारी है। यदि इससे भूमि खरीद फ़रोख्त पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा या आम जनता को नुकसान हुआ तो सरकार इसमें संशोधन करने पर पूरी तरह तैयार है।”

सरकार के इस बयान को विपक्षी दबाव और बढ़ते जन असंतोष के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

विपक्ष का तीखा हमला

प्रदेश कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों ने नई गाइडलाइन को तानाशाही करार देते हुए कहा कि इससे किसानों, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के वरिष्ठ नेता ने कहा —“सरकार भूमि की कीमतें बढ़ाकर लोगों के सिर पर आर्थिक बोझ डाल रही है। इससे न तो विकास होगा और न ही आम जनता को राहत मिलेगी।”

कांग्रेस ने इसे ‘रियल एस्टेट सेक्टर को झटका’ बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

भूमि दाम बढ़ने से जमीन बाजार में ठहराव

नई कीमतों के कारण राज्यभर में रजिस्ट्रियों की गति धीमी हो गई है। रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि कीमतें बढ़ने से जमीन, मकान और प्लॉट खरीदना अब आम आदमी की पहुँच से बाहर होता जा रहा है।

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा और रायगढ़ जैसे बड़े शहरी इलाकों में अभी से जमीन खरीद फरोख़्त में 30 से 45 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।

किसानों की चिंता बढ़ी

गाइडलाइन के बाद कई किसानों ने जमीन बेचने की प्रक्रिया रोक दी है। ग्रामीणों का कहना है कि कीमतें बढ़ने से खरीदार कम हो जाएंगे और लेन-देन मुश्किल हो जाएगा।

एक किसान ने कहा—  “हम चाहते हैं कि सरकार फैसला सोच-समझकर ले। जमीन हमारे लिए संपत्ति ही नहीं, जीवन की पूंजी है।”

सरकार के लिए चुनौती: राहत दे या निर्णय बरकरार रखे?

राजनीतिक रूप से यह मुद्दा सरकार के लिए एक परीक्षा बन गया है। क्योंकि एक तरफ राजस्व वृद्धि का लक्ष्य है तो दूसरी तरफ जनता का बढ़ता विरोध।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है—  “यदि सरकार ने गाइडलाइन वापस ली तो विपक्ष इसे अपनी जीत बताएगा, और यदि नहीं ली तो जनता में असंतोष बढ़ सकता है।”

आगे क्या?

सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में अधिकारी, विशेषज्ञ और हितधारक बैठक कर संशोधन की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

यदि परिस्थितियाँ अनुरूप रहीं तो प्रदेश की नई जमीन नीति में संशोधन या आंशिक बदलाव संभव है।

नई जमीन गाइडलाइन ने छत्तीसगढ़ में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। सरकार के रुख में नरमी जनता की आवाज और विपक्षी दबाव के मिलेजुले प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।

संबंधित पोस्ट

शक्कर कारखाना पंडरिया मे कर्मचारी अपने मांगो को लेकर हड़ताल पर

hindmedianews

रुपयों के आगे नतमस्त जिम्मेदार: पंडरिया का जंगल थाना क्षेत्र कुकदूर बना जुआ का व्यापारीकरण 

Sakshi Bansod

मुख्यमंत्री ने की बड़ी घोषणा लाल खदान ओवरब्रिज होगा शहीद वीर नारायण सिंह के नाम पर

Sakshi Bansod

थाना जरहागांव क्षेत्रान्तर्गत आरोपी रितिक साहू कोे आम जनता को रूपये पैसे का लालच देकर अंकों पर कागज एवं मोबाइल मे सट्टा पट्टी लिखते किया गया गिरफ्तार

rakeshbhaskar

हिन्दुस्तान में अब लोकसभा की 1132 की सीटें होगी-नामदेव छत्तीसगढ़ रा’य में 24 सांसद चुने जाएंगे

Chunesh Sahu

*ग्राम मुडपार के साप्ताहिक बाजार से चांदी के गहने से भरा हुआ बैग की चोरी,रूद्री थाना में मामला दर्ज*

Chunesh Sahu