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भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र पर बड़ा विवाद, मामले ने पकड़ा तूल , अंतिम सुनवाई, आदिवासी समाज ने FIR की उठाई मांग

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बलरामपुर–रामानुजगंज जिले के प्रतापपुर विधानसभा से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से गर्मी बढ़ा दी है। यह मामला अब न्यायालय, प्रशासन और समाज – तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है।

सर्व आदिवासी समाज सड़क पर, पुलिस चौकी का घेराव सोमवार को बड़ी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के लोग वाड्रफनगर पुलिस चौकी पहुंचे। उनका नेतृत्व आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह कर रहे थे। समाज की प्रमुख मांग थी कि विधायक पोर्ते पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला दर्ज किया जाए और न्यायिक जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए।

प्रदर्शन के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मामला सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।

पुलिस ने कहा — रिपोर्ट के बाद ही कार्रवाई

पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त करते हुए बताया कि मामले की जांच के लिए जिला स्तर पर गठित छानबीन समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद ही FIR, निरस्तीकरण या अन्य कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

कैसे शुरू हुआ विवाद? इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब आदिवासी समाज की ओर से विधायक के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। आरोप है कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र उनके पति की जाति के आधार पर बनाया गया है।

नियमों के अनुसार — जाति प्रमाण पत्र पिता की जाति के आधार पर जारी किया जाता है, न कि विवाह के बाद बदली गई स्थिति पर। याचिका में दावा किया गया है कि यह प्रमाण पत्र नियमों के विपरीत तरीके से जारी किया गया है और इसका लाभ चुनाव में उठाया गया।

हाई कोर्ट की सख्ती: दस्तावेजों के साथ पेश होने का नोटिस हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर से जांच समिति बनाने और निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने विधायक पोर्ते को भी की अंतिम सुनवाई में सभी मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है।

निर्णायक दिन — क्या हो सकता है बड़ा फैसला? अब पूरा मामला छानबीन समिति की रिपोर्ट पर टिका है।विशेषज्ञों के अनुसार, रिपोर्ट और कोर्ट की सुनवाई के आधार पर संभावित कदम हो सकते हैं—

✔ जाति प्रमाण पत्र निरस्त

✔ एफआईआर या न्यायिक जांच

✔ निर्वाचन आयोग को सूचना

✔ चुनाव रद्द होने की संभावित कार्रवाई (यदि प्रमाण पत्र फर्जी सिद्ध हुआ)

राजनीतिक रूप से भी इस प्रकरण के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि मामला आरक्षण, पहचान और संवैधानिक मान्यता जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ा है। अब निगाहे पूरे जिले में इस मुद्दे को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच अब हर किसी की नजर सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।यह दिन निश्चित रूप से विधायक, प्रशासन और समाज — सभी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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