
चुनेश साहू । धमतरी।
जिला मुख्यालय में स्थित कलेक्टर कार्यालय की अति संवेदनशील गोपनीय शाखा में प्रशासनिक अव्यवस्था और संरक्षण के गंभीर आरोपों ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। सूचना के अधिकार (RTI) से खुलासा हुआ है कि समग्र शिक्षा विभाग की एक महिला संविदा कर्मचारी को पिछले कई वर्षों से बिना किसी वैध प्रतिनियुक्ति या संलग्नता आदेश के गोपनीय शाखा में बैठाकर अहम फाइलें और गोपनीय दस्तावेज संभाले जा रहे थे।
RTI कार्यकर्ता ने जब संलग्नता आदेश की प्रमाणित प्रति मांगी तो जिला कार्यालय ने लिखित में स्वीकार किया कि “ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।” यानी वर्षों तक एक बाहरी संविदा कर्मचारी बिना नियम कायदों के आधार पर जिला की सबसे गोपनीय शाखा में बैठी रही और किसी ने सवाल तक नहीं उठाया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि RTI का जवाब आने के महज कुछ दिनों के अंतराल में ही उक्त कर्मचारी को “त्वरित भारमुक्त” कर दिया गया। प्रशासन की इस फुर्ती ने शक को और गहरा दिया है। जब कोई आदेश था ही नहीं तो भारमुक्ति किस नियम से की गई? क्या यह सबूत मिटाने की जल्दबाजी थी?
स्थानीय RTI कार्यकर्ता ने इसे “प्रशासनिक मिलीभगत का जीता-जागता प्रमाण” करार दिया है। उनका कहना है कि गोपनीय शाखा में अनधिकृत व्यक्ति का इतने लंबे समय तक बैठना न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि जिले की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए गंभीर खतरा है। इसमें उच्च अधिकारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।
वहीं आश्चर्यजनक रूप से भारमुक्ति के बावजूद उक्त संविदा कर्मचारी आज भी कलेक्टर कार्यालय परिसर में बेरोकटोक घूमती दिखाई दे रही है। कई लोगों ने उसे वरिष्ठ अधिकारियों के कक्ष में जाते और विशेष बातचीत तक करते देखा है। सवाल उठता है – आखिर इतनी हिम्मत और संरक्षण कहाँ से मिल रहा है?
यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी की अवैध तैनाती नहीं, बल्कि धमतरी जिला प्रशासन की पूरी कार्यप्रणाली पर एक सवालिया निशान है। अगर RTI न लगती तो यह घोटाला शायद कभी सामने न आता। जनता अब मांग कर रही है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच हो, दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और गोपनीय शाखा की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। नहीं तो भरोसा उठ जाएगा कि धमतरी का कलेक्टर कार्यालय अब “गोपनीय” नहीं, बल्कि “खुला बाजार” बन चुका है।
चुनेश साहू 9111988965





