
रायपुर। राज्य में आज से बहुप्रतीक्षित धान खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है, लेकिन पहले ही दिन कई खरीदी केंद्रों में ताला झूलता दिखाई दिया। वजह—केंद्र प्रबंधक, डेटा एंट्री ऑपरेटर और कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल, जिसके चलते किसानों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने पूरे प्रदेश में खरीदी की औपचारिक शुरुआत की घोषणा तो कर दी, लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
किसान सुबह से लाइन में—पर केंद्र बंद
राजधानी रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी, दुर्ग, कांकेर, महासमुंद सहित कई जिलों से रिपोर्ट मिली है कि किसान सुबह 6 बजे से ही बोरी और वाहन लेकर खरीदी केंद्रों में पहुंच गए थे। लेकिन वहां ताला लगा मिला।
किसानों ने बताया कि: “हम लोग सुबह से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई अधिकारी केंद्र नहीं आया” “धान कट चुका है, खेत में जगह नहीं। खरीदी बंद रही तो नुकसान होगा।”
कई किसानों ने बताया कि धान बेचकर ही वे अगली फसल की तैयारी और घरेलू खर्च चला पाते हैं, ऐसे में खरीदी प्रक्रिया रुकना उनकी चिंता बढ़ा रहा है।
हड़ताल पर क्यों? प्रबंधकों और ऑपरेटरों की बड़ी मांगें
सूत्रों के अनुसार, केंद्र संचालक, प्रबंधक और ऑपरेटर कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर नाराज़ चल रहे थे। प्रमुख मांगें—मानदेय बढ़ाने की मांग समय पर भुगतान खरीदी सीजन में अतिरिक्त स्टाफ
डिजिटल एंट्री के लिए पर्याप्त संसाधन लंबे समय से लंबित प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने के बाद आज से असुचित हड़ताल शुरू कर दी गई।
सरकारी व्यवस्था पर सवाल—कलेक्टरों की आपात बैठके
कई जिलों में स्थिति बिगड़ती देख कलेक्टरों ने आपात बैठकें बुलाई हैं। खाद्य विभाग ने भी जिला अधिकारियों को निर्देश भेजा है कि विकल्पी व्यवस्था तुरंत लागू की जाए। हालांकि अंदरखाने यह भी बताया जा रहा है कि विभाग को पहले से ही हड़ताल की जानकारी थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया
सरकार की सफाई
सरकारी प्रवक्ता का बयान सामने आया है कि—खरीदी प्रक्रिया को किसी भी हालत में बाधित नहीं होने दिया जाएगा हड़तालियों से बातचीत के लिए समिति गठित की गई है किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इससे उलट नजर आते हैं। किसानों की चिंता बढ़ी—धान खराब होने का डर प्रदेश में कई जगह धान की नमी बढ़ने लगी है। लगातार ठंड और ओस से बोरे गीले हो रहे हैं। ऐसे में खरीदी में देरी किसानों के लिए सीधे आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
किसानों का कहना है—“धानी मंडी में जगह नहीं, घर में जगह नहीं, अब खरीदी भी बंद हो गई तो धान खराब होगा।”“सरकार जल्द समाधान निकाले, नहीं तो हालात बिगड़ेंगे।”कई जगह प्रदर्शन शुरू, प्रशासन के लिए चुनौती
कई जिलों में किसानों ने खरीदी केंद्रों के बाहर धीमी रफ्तार से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वे चाहते हैं कि सरकार तत्काल बातचीत कर व्यवस्था बहाल करे।
निष्कर्ष : खरीदी की शुरुआत में ही संकट
धान खरीदी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हर साल करोड़ों क्विंटल धान की खरीदी होती है। लेकिन इस बार शुरुआत में ही व्यवस्था चरमराती दिख रही है।
यदि हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में
किसानों की नाराज़गी बढ़ सकती हैमंडियों में भीड़ और अव्यवस्था हो सकती हैधान खराब होने से नुकसान बढ़ेगा सरकार की छवि पर भी सवाल उठेंगे





