
अजय जांगड़े
कवर्धा।माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अंत्यावसायी विकास विभाग कवर्धा के तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन अधिकारी दीपक सिंह नामदेव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 और 13 के तहत लगे सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इस मामले की सुनवाई माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच में हुई, जिन्होंने निचली अदालत के दोषसिद्धि आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि अपीलकर्ता द्वारा किसी प्रकार की अवैध रिश्वत की मांग या स्वीकार किया गया था।
गौरतलब है कि एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने 17 जनवरी 2019 को दीपक नामदेव के कार्यालय में छापा मारकर कार्यवाही की थी। बाद में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था, जिसके विरुद्ध नामदेव ने अपने अधिवक्ता श्री गौतम खेत्रपाल के माध्यम से उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता श्री खेत्रपाल ने यह दलील दी कि “शिकायतकर्ता को ऋण की पूरी राशि पहले ही वितरित की जा चुकी थी, अतः किसी भी अतिरिक्त राशि के लिए रिश्वत मांगने का कोई औचित्य ही नहीं था। अभियोजन यह सिद्ध नहीं कर सका कि अपीलकर्ता ने किसी भी समय रिश्वत की मांग की। उन्होंने आगे तर्क रखा कि मांग के ठोस प्रमाण के बिना मात्र किसी राशि की बरामदगी को रिश्वत नहीं माना जा सकता, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत अपराध की अनिवार्य शर्त है।
साथ ही मुख्य गवाह पुनेश्वर वर्मा (छाया साक्षी) और एस.के. लाल (पंच साक्षी) दोनों ने अदालत में यह स्वीकार किया कि उन्होंने न तो कोई रिश्वत लेते देखा, न ही ऐसा कुछ सुना। इसके अलावा कथित रकम भी खुले स्थान से बरामद की गई थी, जिससे अभियोजन की कहानी और भी कमजोर साबित हुई।
प्रकरण से जुड़ी पृष्ठभूमि में यह भी स्पष्ट हुआ कि कामू बैंगा नामक व्यक्ति, जिसे पहले ऋण स्वीकृत किया गया था, कार्य नहीं कर रहा था। उसे विभाग द्वारा नगर सैनिक के माध्यम से दो बार नोटिस भेजे गए और अंततः वसूली की कार्यवाही हेतु अंतिम नोटिस जारी किया गया। इसी के बाद उसने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी।
इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों के मद्देनज़र माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने 05 जुलाई 2023 को निचली अदालत के दोषसिद्धि आदेश को “अपास्त एवं निरस्त” करते हुए कहा कि अभियुक्त दीपक सिंह नामदेव पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।इस प्रकार, दीपक सिंह नामदेव को सभी आरोपों से पूर्णतः बरी किया गया।





