
कवर्धा,आदिवासी और अनुसूचित जाति समाज की बेटियों पर लगातार हो रहे अत्याचारों ने पूरे समाज की आत्मा को झकझोर दिया है। आए दिन कभी कवर्धा में मासूम बच्चियों की अस्मत लूटने की खबरें सामने आती हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन और सत्ता दोनों की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।
सवाल सीधा है – भाजपा हो या कांग्रेस, सत्ता से बाहर आओ और आदिवासी बेटी को न्याय दिलाओ। केवल वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेताओं के लिए अब जनता का सब्र जवाब देने लगा है। जब तक गरीब और वंचित समाज की बेटियाँ न्याय से वंचित रहेंगी, तब तक तुम्हारा दशहरा और दिवाली फीका है, क्योंकि राक्षसों ने तुम्हारी आदिवासी बेटी की अस्मत लूट डाली है।
पुलिस की नाकामी और प्रशासन की लाचारी भी किसी से छिपी नहीं है। आदिवासी बेटी के दोषियों को पकड़ने में जिला पुलिस की असफलता ने पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह न्याय व्यवस्था की सड़ांध नहीं है कि मासूम और गरीब परिवार की इज्जत तो लूटी जाती है, लेकिन दोषी खुलेआम घूमते रहते हैं?
समाज का गुस्सा अब और बढ़ता जा रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि सत्ता में बैठे राजनीतिक बादशाहों की बेटियों के साथ ऐसी घटनाएँ क्यों नहीं होतीं? क्यों हर बार आदिवासी और दलित समाज की बेटियाँ ही शिकार बनती हैं?
यह समय है जब पूरा समाज उठ खड़ा हो और सत्ता से सवाल पूछे। क्योंकि हर बार की चुप्पी, हर बार की राजनीति और हर बार की असफलता केवल यह साबित करती है कि नेताओं के लिए इंसाफ से ज्यादा अहमियत उनकी कुर्सी और वोट बैंक की राजनीति की है।





