पंडरिया: भाजपा प्रत्याशी मंजुला देवी कुर्रे को पंडरिया की जनता समर्थन करने से इनकार कर रही है क्योंकि वह 10 वर्ष पहले भी अध्यक्ष के पद पर नगर में शासन कर चुकी है। जो अब पुनः पंडरिया की अध्यक्ष बनने की होड़ में हैं, कार्यालयीन अधिकारी कर्मचारियों में दहशत का माहौल भी बना हुआ।
नगरीय निकाय चुनाव एक दिन बाद और उसके एक दिन बाद मतगणना होगा। पंडरिया नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के आमने सामने टक्कर दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से मंजुला कुर्रे चुनावी मैदान पर हैं। मंजुला कुर्रे पूर्व में नगर पंचायत पंडरिया की 2006-07 में रह चुकी हैं उसी समय कुछ बाते को लेकर तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी ठा. भोला सिंह को सैंडल निकाल कर मारने दौड़ी थी। कार्यालय नगर पंचायत में मौजूद सभी अधिकारी कर्मचारियों में दहशत फैला गया और हिम्मत दिखाते हुए लेडी डॉन का रौद्र रूप को मना कर शांत कराया है ।
इसलिए इनके कार्यकाल में विकास न होने की चर्चाएं लोगों में खलबली मचा रही है, नगरीय निकाय पंडरिया के लोगों का यह मानना है कि ये अपने कार्यकाल में केवल कमीशन बंटवारे की बातों को लेकर अक्सर चर्चा में बनी हुई हुई थी, जिसका परिणाम उन कार्यकाल में गुणवत्ता हिन कार्य एवं कमीशन गिरी का खेल संचालित था तो वहीं जनता की रुपयों का खुली दुरुपयोग किया गया था।
जनता की सुगबुगाहट से पता चला है कि वह सामाजिक व्यवस्था में भी अपनी भूमिका नहीं के समान निभाती रही हैं जिससे स्व जातीय मतदाता में रोष है तो वहीं भाजपा प्रत्याशी मंजुला देवी कुर्रे को अपनी मत नहीं देने की आपसी सहमति जता रहे हैं। जिसका परिणाम नगर पालिका परिषद पंडरिया में कमल नहीं खिल पाएगा ऐसा लोगों का मानना है।
यह भी है कारण जनता का मंजुला देवी को मत न देने का कारण
वर्तमान में नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मंजुला देवी कुर्रे को एक सर्वे के मुताबिक पंडरिया की जनता ने समर्थन देने से इंकार कर रही है क्योंकि उसका कोई भूमिका शिथिल नजर आ रही है जिसका कारण नगर विकास व समाजविकास के लिए घातक साबित हो सकता है। ऐसे प्रत्याशी जिनके पास प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई भी व्यक्ति नजर नहीं आ रहा है उनके प्रतिनिधित्व केवल और केवल भाजपा के कार्यकर्ता ही करेंगे जिसके चलते किसी भी शर्त में समाज विकास और नगर विकास हो पाना संभव नहीं दिखाई दे रहा है जिसके वजह से जनता ने अपनी रुख बदल दी है है वहीं राजिन सुजीत गायकवाड़ को अपना प्रतिनिधि चुने जाने का नगर विकास के लिए एक दूसरे से स्व विवेक पर अपील करते हुए निर्णय ले रहे हैं जिसके कारण राजीन सुजीत गायकवाड़ को पुनः पंडरिया नगर पालिका परिषद की बागडोर सौंपना उचित समझ रहे हैं।
बागी कार्यकर्ता और जिन्हें नहीं मिला टिकट करेंगे भीतर घात
भाजपा में टिकट के लिए दावेदारी करने वाले लोगों में ऐसे व्यक्ति को टिकट देने से रूष्ट है जो पार्टी के कार्यक्रमों में आगे बढ़ किसी भी कार्यों का दायित्व ले निर्वहन नहीं किया है। पार्टी के लिए जो जवान से बूढ़े और दरी उठाते उनमें एक छाप लग चुका है जो अपनी परिवार छोड़ सकता है पर पार्टी का साथ नहीं ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने और बढ़ने का अवसर नहीं मिल सका जिसके चलते यह भीतर घात होना तय माना जा रहा है वहीं मिली जानकारी के मुताबिक यह स्पष्ट भी हो रहा है हालांकि परिणाम जो भी आए।
केंद्र में सरकार होने के साथ साथ राज्य में भी भाजपा की सरकार स्थापित है पर नगरीय निकायों में एक पक्षीय भाजपा को करारा झटका देने का लोगों में आपसी सहमति बनी हुई जिसका प्रमुख कारण भाजपा के द्वारा नाजायज धन की तरह मतदाताओं को तरह तरह की लालसा देकर लुभाने का भी काम कर रही है जिससे जनता यह भी समझ रही है कि जो मत करने के लिए फिजूल खर्ची कर रहा है वह क्या विकास कर सकता है इससे अच्छा है जो खरीद न सके ऐसा प्रत्याशी को विजय दिलाने की अति आवश्यक है। पंडरिया में भाजपा का हार निश्चित होना सर्वे के आधार पर हुआ है जो भाजपा पर किसी तमाचा जड़े जाने से कम नहीं है। हालांकि स्थानीय विधायक सहित उनके इर्द गिर्द रहने वाले प्यादों की भी कोशिश बनी हुई है कि वह नगर पालिका परिषद में सांप की भांति अपनी फन फैलाकर बैठ सके और प्रत्याशी सिर्फ सपेरे की बीन की तरह रहे जिसे जब चाहा बजा लिया फिर कोई काम का नहीं सरीखा।