छत्तीसगढ़ कबीरधाम: कबीरधाम जिले के पंडरिया जनपद पंचायत क्षेत्र में लगातार भ्रष्टाचार का मामला सामने आ रही है
आपको बता दें कि ग्राम पंचायत कुल्ही डोंगरी के आश्रित ग्राम जामुन पानी में पुलिया निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिसे सही पुलिया निर्माण कहना मुनासिब नहीं होगा । इस पुलिया निर्माण में पुर्ण रूप से अनियमितता देखी जा सकती हैं सरपंच, सचिव तथा R E S के अधिकारी के मिली भगत से हो रहा भ्रष्ट कार्य, आखिरकार कौन और किस शासन तथा प्रशासन के अधिकरी , कर्मचारियों अथवा प्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त हो रहा है इन भ्रष्टाचारियों को , शासन प्रशासन के लाखों रुपयों को बन्दर बांट कर जाते है ऐसे लोग वहीं जनता को धोखा देकर अपनी जेब गरम करते हैं ये लोग ।
जामुन पानी में बन रहे इस पुलिया निर्माण कार्य को देख आप भी भौंचक्का रह जायेंगे इस पुलिया निमार्ण का अनुमानित लागत 10 लाख रुपए बताया जा रहा है जिसमें गुणवत्ता हिन रेत जो की वहीं आस पास के नाले से अवैध उत्खनन कर लाया गया है। अगर गिट्टी की बात करें तो मिट्टी से मिश्रित जिसे सड़को में बेस डाला जाता है अब आपको बता दें कि इसमें सरिया ( छड़ ) 6 mm ,8 mmका लगायाहै वो भी बहुत ही दूर ~ दूर में इस प्रकार निर्माण हो रहे पुलिया की क्या उम्र होने की कल्पना किया जा सकेगा ?
इस पुलिया की टिकाऊ होने की क्या उम्मीद किया जा सकेगा ?
ग्राम पंचायत कुल्ही डोंगरी के सरपंच,सचिव सहित प्रशानिक अधिकारियों, कर्मचारियों का क्या इस भ्रष्ट कार्य में संलिप्त पाया जाना मुनासिब नहीं होगा।
इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने जब R E S के कार्यालय जाकर वहां पदस्थ RES एसडीओ अमृत लाल उरैहा से जानकारी मांगी गई तथा उनसे वर्जन ( बाइट) लेने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने अपने काले करतूत को छुपाने पत्रकार को भला बुरा कह अभद्र व्यवहार किया गया। जबकि प्रारंभ से पहले निर्माण सामाग्री जांच परीक्षण अनिवार्य होता है तथा सही पाए जाने पर ही निर्माण कार्य प्रारंभ करने की अनुमति दी जाती है , लेकिन यहां भ्रष्टाचारियों, दोगले, बेईमानो की नेटवर्क है ।
आखिर कब तक चलता रहेगा ये खेल आखिर क्यों लामबंद हैं सम्बंधित अधिकारी, आखिर क्यों मलाई खाने की आदत डाल बैठे हैं ये लोग । क्यों मूल्यांकन, सत्यापन के जादूगर बने बैठे हैं ये अधिकारी, कर्मचारी वहीं कांग्रेस विधायक ममता चंद्राकर के विधानसभा क्षेत्र में ऐसा कार्य देखने को मिल रहा है ।
अब देखना यह है कि क्या इन दोषी सरपंच, सचिव सहित संबंधी अधिकारी के उपर क्या Ipc की धारा के तहत मुकदमा चलाया जाएगा या फिर समझौता या इनके इस कृत्य को लेकर इन्हे सम्मान देना मुनासिब होगा ।