
छग/धमतरी चुनेश साहू
धमतरी जिले में राजस्व विभाग की अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार सामने आ रही शिकायतों और खबरों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही, जिससे जनता में गहरा असंतोष व्याप्त है। जिला प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही अनेक सवाल खड़े कर रही है।
जानकारी के अनुसार, जिले में राजस्व संबंधी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जिनमें भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी, नक्शा बंटवारे में देरी, और अन्य मामलों का समावेश है। इन मुद्दों पर धमतरी विधायक ओंकार साहू ने भी सदन और सार्वजनिक मंचों पर बार ध्यानाकर्षण कराया है। उन्होंने प्रशासन से त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन जिला प्रशासन इन आवाजों पर ध्यान देने को तैयार नहीं दिख रहा। विधायक के उठाए गए सवालों के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिससे यह संदेह गहरा रहा है कि क्या उच्च स्तर पर कोई संरक्षण का खेल चल रहा है?
इसी बीच कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने 20 जनवरी को राजस्व अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक बुलाई है, जिसमें ई-कोर्ट, स्वामित्व योजना, नक्शा बटांकन, आधार सीडिंग, डिजिटल हस्ताक्षर, सर्वे-रिसर्वे, सीएम डैशबोर्ड और दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना जैसी योजनाओं की प्रगति पर चर्चा होगी। बैठक सुबह 11 बजे कलेक्टोरेट सभाकक्ष में होगी और सभी राजस्व अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन सवाल यह है कि जब जिले में राजस्व अनियमितताओं की बाढ़ आ रही है और शिकायतों का ढेर लग रहा है, तो केवल योजनाओं की प्रगति पर समीक्षा से क्या हल निकलेगा? आम जनता और किसान वर्ग में यह धारणा मजबूत हो रही है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई और बैठकों तक सीमित है, जबकि जमीन पर स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगा, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाएगा।
बहरहाल देखना होगा समीक्षा के नतीजे क्या निकलते हैं
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