
सरगुजा— जिले में महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आने के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला है। घटना के तीन महीने बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने संबंधित थाना प्रभारी व जांच अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
मिली जानकारी के अनुसार पीड़िता ने पुलिस में आवेदन देकर अपने साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत तीन महीने पहले दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर मामले को हल्के में लेते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब पीड़िता ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई।
IG ने दिया तत्काल आदेश
जैसे ही मामला सरगुजा IG तक पहुंचा, उन्होंने गंभीरता दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई की। देर शाम जारी आदेश में संबंधित थाना प्रभारी सहित दो अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, वहीं पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है।
आईजी ने स्पष्ट कहा है कि— “यौन अपराधों से जुड़े मामलों में देरी, लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कानून पीड़िता के पक्ष में है और पुलिस की पहली जिम्मेदारी है कि उसकी शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज की जाए।”
पीड़िता का बयान दोबारा दर्ज
सूत्रों के अनुसार SIT ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पीड़िता का बयान न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत पुनः दर्ज कराया गया है। मेडिकल जांच और घटना स्थल निरीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ा दबाव
घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और महिला सुरक्षा से जुड़े समूहों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि: “ऐसे मामलों में देरी न सिर्फ न्याय में बाधा है बल्कि पीड़िता के मानसिक आघात को और बढ़ाती है।”
कहां हुई चूक? पूरे मामले में सवाल उठ रहा है कि आखिर तीन महीने तक पुलिस चुप क्यों रही? क्या आरोपी प्रभावशाली हैं? या मामले को दबाने की कोशिश की गई? हालांकि अब जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
सरकार की नजर , राज्य सरकार ने भी घटना को गंभीरता से लिया है और पुलिस मुख्यालय से इस मामले पर रिपोर्ट तलब की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मिले सूत्रों के अनुसार पीड़िता को विधिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
आगे क्या?
SIT को 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में और भी अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो कार्रवाई और व्यापक हो सकती है।
यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पुलिस प्रणाली की संवेदनशीलता, जवाबदेही और आम नागरिकों के अधिकारों की परीक्षा बन चुका है।





