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ये धमतरी राजस्व है…. यहां न्याय भी बिकता है….धमतरी जिले में राजस्व न्यायालयों की साख दांव पर यहां न्याय बिकता है…. मिलता नहीं.. न्याय की खरीद-फरोख्त जारी

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ये धमतरी राजस्व है….

धमतरी जिले में राजस्व न्यायालयों की साख दांव पर
यहां न्याय बिकता है…. मिलता नहीं.. न्याय की खरीद-फरोख्त जारी

चुनेश साहू । धमतरी,

जिला धमतरी के राजस्व विभाग में न्याय की खरीद-फरोख्त का एक नया काला अध्याय सामने आया है, जहां तहसीलदार मगरलोड भारद्वाज और पटवारी ध्रुव साहब की जोड़ी कथित रूप से रिश्वत लेकर नियम-कानूनों को ताक पर रख रही है। सूत्रों के मुताबिक, गरीब किसानों के नाम सुधार आवेदनों में पैसे के आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे आम आदमी की न्याय व्यवस्था पर विश्वास डगमगा रहा है। यह मामला ग्राम सौगा और पंहदा के दो अलग-अलग आवेदनों से जुड़ा है, जो दर्शाता है कि यहां न्याय नहीं मिलता, बल्कि न्याय की खरीद फ़रोख्त होता है ।

मामले की शुरुआत ग्राम सौगा के किसान निरेश कुमार से होती है। निरेश कुमार, पिता कन्हैया , जाति महार, के नाम पर खसरा नंबर 259/2 (रकबा 0.01 हेक्टेयर) और खसरा नंबर 87 (रकबा 0.15 हेक्टेयर) की भूमि दर्ज है। लेकिन रिकॉर्ड में उनका नाम गलती से शिव कुमार पिता कन्हैयालाल दर्ज हो गया। निरेश ने इस त्रुटि को सुधारने के लिए तहसीलदार मगरलोड भारद्वाज के न्यायालय में आवेदन दाखिल किया। तहसीलदार ने पटवारी को जांच का आदेश दिया। पटवारी की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि निरेश और शिव कुमार एक ही व्यक्ति हैं। लेकिन आवेदक ने रिश्वत न चढ़ाई, तो तहसीलदार ने धारा 115 का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह केवल लिपिकीय या मात्रात्मक त्रुटि सुधार का अधिकार है, जबकि मामला नाम सुधार का था। निरेश कुमार अब न्याय की आस में भटक रहे हैं, और उनका कहना है कि बिना पैसे के यहां कुछ नहीं होता।

वहीं, दूसरी ओर पटवारी ध्रुव के प्रभार वाले ग्राम पंहदा में एक समान मामला सामने आया, लेकिन यहां नतीजा बिलकुल उलट रहा। फूलचंद पिता सुदर्शन, जाति कोष्टा, ने तीन सह-खातेदारों के नाम सुधारने का आवेदन दिया। आवेदन में कुंतीबाई, राधाबाई और कलाबाई के नामों को क्रमशः मीनाबाई देवांगन, हेमबाई देवांगन और गीता देवांगन में बदलने की मांग की गई। तहसीलदार भारद्वाज ने फिर पटवारी ध्रुव को जांच सौंपी। सूत्रों के अनुसार, यहां रिश्वत का खेल चला। पटवारी ध्रुव ने ऐसी ‘जुगाड़’ लगाई कि तहसीलदार ने वही नियम-कानून भुलाकर 24 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर दिया। जहां निरेश के मामले में एक नाम सुधार को असंभव बताया गया, वहीं यहां तीन नामों का सुधार हो गया। यह स्पष्ट दर्शाता है कि विभाग में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं, और फैसले पैसे की ताकत पर निर्भर हैं।

यह घटना राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तहसीलदार भारद्वाज और पटवारी ध्रुव की यह जोड़ी लंबे समय से ऐसे कारनामों में लिप्त है। एक स्थानीय किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब जेब में पैसा हो, तो सब खरीदा जा सकता है। यहां न्याय की कीमत तय है, और गरीबों को सिर्फ ठोकरें मिलती हैं।” धमतरी जिले में राजस्व न्यायालयों की साख दांव पर लगी है, जहां आम आदमी के हक छीने जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, और उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं।

 

 

चुनेश साहू 9111988965

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