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न्यायालय की आड़ में राजस्व नियमों का उल्लंघन वर्तमान तहसीलदार मगरलोड और वर्तमान पटवारी पर गंभीर आरोप

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न्यायालय की आड़ में राजस्व नियमों का उल्लंघन वर्तमान तहसीलदार मगरलोड और वर्तमान पटवारी पर गंभीर आरोप

 

मगरलोड:- तहसील मगरलोड के लडेर ग्राम में वर्तमान तहसीलदार और वर्तमान पटवारी द्वारा राजस्व नियमों की खुली अनदेखी कर एक गंभीर बंदोबस्त त्रुटि सुधार प्रकरण को सामान्य त्रुटि मानकर सुधार किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है यह कृत्य न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है बल्कि अधिकारियों की योग्यता और ईमानदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है

यह पूरा मामला ग्राम लडेर निवासी आवेदक खुमान पिता मनराखन से जुड़ा है आवेदक ने खसरा नंबर 974 और 975 जिसका कुल रकबा 012 हेक्टर और 012 हेक्टर है उस भूमि पर बंदोबस्त के दौरान इंद्र कुमार और सोनूराम पिता बंसीलाल जाति कुर्मी के नाम हुई त्रुटि को सुधारने के लिए तहसीलदार न्यायालय मगरलोड में आवेदन प्रस्तुत किया था आवेदक ने अपने पक्ष में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए थे जिसमें बंदोबस्त पूर्व खसरा बी-1 की प्रति बंदोबस्त पूर्व नामांतरण पंजी की प्रति और बंदोबस्त पूर्व पंजीकृत बैनामा की प्रति शामिल थी ये दस्तावेज स्पष्ट रूप से यह दर्शाते थे कि मामला बंदोबस्त के समय हुई त्रुटि से संबंधित है और इसका निराकरण एक विशेष कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए

राजस्व संहिता के जानकार इस पूरे घटनाक्रम को राजस्व नियमों का घोर उल्लंघन बता रहे हैं उनका स्पष्ट कहना है कि जब त्रुटि राजस्व सर्वेक्षण या बंदोबस्त के दौरान हुई हो तो उसका सुधार भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 89 के तहत शीर्ष अ-5 में दर्ज कर ही किया जाना चाहिए यह प्रावधान बंदोबस्त त्रुटियों के लिए विशेष रूप से बनाया गया है

हालांकि वर्तमान तहसीलदार ने सभी प्रस्तुत साक्ष्यों और राजस्व नियमों को दरकिनार करते हुए इस गंभीर बंदोबस्त त्रुटि सुधार प्रकरण को नामांतरण की धारा 109,110 मानते हुए शीर्ष अ-6 में दर्ज कर दिया।

प्रकरण को गलत शीर्ष में दर्ज करने के बाद तहसीलदार ने वर्तमान पटवारी को जांच के लिए ज्ञापन जारी किया वर्तमान पटवारी ने भी न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन किया और स्थल जांच कर सीधे अनावेदकों का नाम विलोपित कर आवेदक का नाम दर्ज करने हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया राजस्व विशेषज्ञों के अनुसार पटवारी का यह कर्तव्य था कि वह तहसीलदार को यह प्रतिवेदन देता कि प्रकरण गलत शीर्ष में दर्ज किया गया है और इसे सही धारा के तहत पुन: दर्ज किया जाना आवश्यक है पटवारी द्वारा इस विसंगति को नजरअंदाज करना उसकी व्यावसायिक योग्यता पर प्रश्न उठाता है।

राजस्व जानकारों का यह भी कहना है कि यदि वाद भूमि का एक बार सही नामांतरण हो चुका है तो उस भूमि का दोबारा नामांतरण धारा 109 और 110 में कैसे हो सकता है यदि त्रुटि बंदोबस्त या राजस्व सर्वेक्षण से जुड़ी है और वर्तमान अभिलेख में नाम उसी अनुसार चले आ रहे हैं तो इसका सुधार केवल धारा 89 शीर्ष अ-5 में ही किया जा सकता है 

यह मामला छोटा प्रतीत होता है लेकिन न्यायालय की आड़ में किए गए इस कार्य ने राजस्व विभाग की छवि को धूमिल किया है तहसीलदार और पटवारी जैसे पद धारकों को जो विभागीय परीक्षाएं पास करते हैं और समय समय पर भू राजस्व संहिता के गहन प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं उनके द्वारा की गई यह गंभीर लापरवाही उनकी योग्यता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है इस प्रकार नियमों को तोड़ मरोड़ कर सुधार करने की प्रक्रिया राजस्व व्यवस्था में विश्वास कम करती है और पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करती है। क्या इस मामले पर जिला कलेक्टर कुछ संज्ञान लेगे।

 

 

चुनेश साहू 9111988965

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