
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुए कथित 3200 करोड़ के शराब घोटाले मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्यवाही करते हुए 6 प्रमुख आरोपियों के खिलाफ 6300 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। यह राज्य की अब तक की सबसे बड़ी जांच और सबसे लंबी चार्जशीटों में से एक मानी जा रही है।
EOW की जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा घोटाला तत्कालीन आबकारी आयुक्त और सचिव निरंजन दास के संरक्षण में संचालित हुआ। आरोप पत्र में खुलासा किया गया है कि विभागीय अधिकारियों, शराब ठेकेदारों और निजी कंपनियों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया।
क्या था घोटाले का खेल?
सूत्रों के अनुसार—शराब दुकानों में ओवर बिलिंग और फर्जी इनवॉइस,नकली QR कोड, अवैध कमीशन और सप्लाई में फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की ब्लैक ट्रांजैक्शन प्रणाली बनाई गई थी । EOW का दावा है कि इस घोटाले से राज्य सरकार को 3200 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
चार्जशीट में ये प्रमुख नाम शामिल ,चार्जशीट में जिन छह लोगों के नाम शामिल हैं उनमें—
क्रमांक आरोपी का नाम पद / भूमिका
निरंजन दास तत्कालीन आबकारी आयुक्त एवं सचिव, प्रमुख शराब ठेकेदार कमीशन नेटवर्क संचालक आबकारी विभाग के अधिकारी सिस्टम मैनेजर ,सॉफ्टवेयर ऑपरेटर फर्जी बिल निर्माण जिम्मेदार परिवहन प्रभारी अवैध स्टॉक सप्लाई ठेकेदार का प्रमुख सहयोगी नकद कलेक्शन और डिलीवरी
(नाम न्यायालय प्रक्रिया के चलते गोपनीय रखे गए हैं।)
क्या मिला जांच में?
✔ फर्जी लेन-देन के पासबुक
✔ कैश ट्रांसफर रिकॉर्ड
✔ डिजिटल लॉग फाइल
✔ ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग
✔ मिलीभगत के ईमेल और व्हाट्सएप चैट
EOW ने अदालत में यह भी बताया कि आरोपियों ने आपसी बंटवारे के लिए कैश कलेक्शन रैकेट बना रखा था, जहां हर महीने करोड़ों रुपये बांटे जाते थे।
आगे की कानूनी कार्यवाही
अदालत ने चार्जशीट स्वीकार कर ली है और इस मामले में अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है। EOW अब मामले में और अधिक आरोपियों को शामिल करते हुए पूरक आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
इस घोटाले के खुलासे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं पूर्व पदाधिकारियों ने इसे राजनीतिक बदला बताया है।





