
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में शासन-प्रशासन को और अधिक पारदर्शी एवं तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश के सभी मंत्री और विधायक हाईटेक होने जा रहे हैं। सरकार ने जनहित से जुड़े प्रस्तावों को तेजी से शासन तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद मंत्री और विधायक एक क्लिक में अपने प्रस्ताव सीधे संबंधित विभाग और शासन तक भेज सकेंगे।
जानकारी के अनुसार, अब तक प्रस्तावों को भेजने की प्रक्रिया काफी समय लेने वाली और कागजी कार्यवाही पर आधारित थी। इससे कई बार आम जनता के कामों में देरी होती थी। लेकिन नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि कामकाज में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
सरकार द्वारा तैयार किए गए इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रत्येक विधायक और मंत्री को एक यूनिक आईडी और पासवर्ड प्रदान किया जाएगा। इसके जरिए वे अपने क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों, समस्याओं और योजनाओं के प्रस्ताव सीधे सिस्टम में अपलोड कर सकेंगे। संबंधित विभाग के अधिकारी भी उसी प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावों की स्थिति को अपडेट करते रहेंगे, जिससे ट्रैकिंग आसान हो जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल इसका ट्रायल चल रहा है। ट्रायल सफल होने के बाद सभी जनप्रतिनिधियों को आधिकारिक रूप से आईडी और पासवर्ड जारी कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें इस प्रणाली के उपयोग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें।
इस नई पहल का सबसे बड़ा लाभ आम जनता को मिलेगा। पहले जहां छोटे-छोटे कार्यों के लिए लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब प्रस्ताव सीधे शासन तक पहुंचने से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी। इससे विकास कार्यों की गति बढ़ेगी और जनता की समस्याओं का समाधान समय पर हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ई-गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी पर भी अंकुश लगेगा।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल प्रदेश के विकास को नई दिशा देने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के कामकाज को भी आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।





