
शक्कर कारखाना का पराई सत्र 2025-26 प्रारंभ हो चुका है,लेकिन आज दिनांक तक कारखाने में प्रारंभ से काम करने वाले मजदूरों को काम पर नहीं बुलाया गया है,, सत्र प्रारंभ होने से पहले कारखाना प्रशासन द्वारा एक नियम बनाया गया था कि सीजन 2016-17 से कार्य करने वाले मजदूरों को पहले काम पर बुलाया जाएगा उसके बाद बाकी सीजन वालों को,लेकिन अब प्रबंध संचालक के द्वारा अपने ही बनाए नियम के विरुद्ध जाकर मनमानी करते हुए 2017 वालों की जगह 2020,21,22 में आने वाले मजदूरों को काम पर बुला लिया गया है,,जो कि पूर्ण रूप से कारखाना प्रशासन की मनमानी है और इससे सैकड़ों मजदूरों को कारखाना से निकालने की एक साजिश प्रशासन द्वारा की जा रही है..इससे मजदूरों में डर व्याप्त हो गया है।
ट्रांसफर हुये अधिकारी को रोक कर मजदूरों को और कारखाना को लूटने का काम किया जा रहा है । महाप्रबंधक राकेश राजपूत के ट्रांसफर हो जाने बाद भी प्रशासन द्वारा रिलीफ नहीं दिया जा रहा
विगत दिनों कारखाना के महाप्रबंधक प्रशासन राकेश राजपूत का ट्रांसफर मंत्रायल कर दिया गया है लेकिन उसके बाद भी प्रबंध संचालक द्वारा उनको अभी तक रिलीफ ना देना भी बड़ा सवाल खड़ा करता है..राकेश राजपूत के ऊपर पूर्व में भी अनेक आरोप लगते आए है जिससे कारखाना को भारी नुकसान भी हुआ है,और मजदूरों को काम से निकालने में भी वो शामिल है..प्रबंधक संचालक द्वारा उनको रिलीफ ना देना इस बात को ओर पुष्ट करता है कि दोनों की मिली भगत से कारखाना को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है
भारतीय मजदूर संघ शक्कर कारखाना pandariya इसका घोर विरोध करा है





