
विद्यालय परिसर में भव्य जनजातीय वस्तु प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और जीवनशैली से रूबरू कराया गया।
प्रदर्शनी में परंपरागत वस्त्र, आभूषण, ढोल-नगाड़ा जैसे वाद्ययंत्र, शिल्पकला, मिट्टी-बाँस से बने घरेलू एवं पूजा सामग्री, साथ ही कृषि उपकरणों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। छात्रों ने विभिन्न जनजातीय समुदायों की विशिष्ट पहचान, कला और कौशल को ध्यानपूर्वक समझा।
इसी कड़ी में विद्यार्थियों को जनजातीय परिवारों के घरों का भ्रमण भी करवाया गया, जहाँ उन्होंने जनजातीय रीति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान और सामाजिक परंपराओं को करीब से देखा। बच्चों ने ग्रामीण परिवेश में उपयोग होने वाले पारंपरिक औजारों और बांस-लकड़ी से बने दैनिक उपयोग की वस्तुओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि ऐसे आयोजन का उद्देश्य छात्रों में संस्कृति संरक्षण, विविधता का सम्मान और आदिवासी समाज के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
दिनभर चले इस कार्यक्रम ने छात्रों में जनजातीय संस्कृति के प्रति उत्सुकता और गर्व की भावना जगाई।





