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*आधिकारी की उदासीनता के चलते कर्मचारियों पर नहीं रहा कोई लगाम….. .* *अस्पताल की घोर लापरवाही… परिवार पर भारी….. क्या होगी जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्यवाही…. या बचाने के चक्कर में अधिकारी.?.?.?.?.*

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Chattisgarh

छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में बदर जिला के निजी अस्पतालों में रेफर, रेफर कमीशन का खेल धड़ल्ले से जारी है जिस पर जिम्मेदार अधिकारियों का लगाम नहीं है।

अपको बताते चलें बीते महीने एक व्यक्ती जो अरमरीकला में एक्सीडेंट हादसे के चलते गंभीर रूप से घायल हो गया था जिसे 108 एम्बुलेंस के माध्यम से गुरुर विकासखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया था जिसकी रिकार्ड एम्बुलेंस सूची में एक्सिडेंटल दर्ज है।

बहरहाल मरीज गंभीर रूप से घायल था जिसका कारण सिर पर गहरी चोट और अत्याधिक रक्त स्राव के चलते अस्पताल में सुविधा ना होने के चलते अगली सुबह अस्पताल के ही कर्मचारी ने बदर जिला स्थित निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया…. जहां आपरेशन की अगली सुबह देहांत हो गया।


प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो घटना को अरमरीकला के लोगों ने देखा है साथ ही एम्बुलेंस में चढ़ाने को मदद भी किए हैं,।

लेकिन कायदे से एक्सिडेंटल केस में प्राथमिक उपचार देखर स्थानीय पुलिस को सुचना अस्पताल प्रशासन को MLC हेतु रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए थी जिससे मर्ग कायम कर एक्सीडेंट करने वाले गाड़ी समेत चालक की पहचाना किया जा सके लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के कर्मचारियों द्वार बगैर पुलिस सूचना दिए निजी अस्पताल में रेफर कर दिया जो नियमतः उचित नहीं है,।

गुरूर वासीयों की मानें तो यह निजी अस्पतालों में रेफर रेफर का खेल बहुत पुराना है जो केवल और केवल निजी अस्पतालों से मिलने वाली मोटी कमीशन जो व्यक्तिगत जेब को भरने के मकसद से किया जाता है बगैर परिजनों के सहमति बकायदा OPD पर्ची में सील साइन कर निजी अस्पतालों में रेफर किया जाता है।

अपको बता दें कि कमीशन के गाढ़ी कमाई के चलते यह खेल धड़ल्ले से जारी है जिसका लगाम जिम्मेदार आधिकारी पर नहीं है।

केन्द्र और राज्य सरकार के संयुक्त विचारधारा के चलते अनेकों कार्यक्रम, योजनाएं बनाई है लेकिन ज़िम्मेदार अधिकारियों के सतत मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण धरातल पर कहीं नहीं बल्कि कागजों तक सिमट कर रह जाता है ।

इसी का ताजा मामला सामने आया है जहां कमीशन के गढ़ी कमाई के चलते निजी अस्पतालों में रेफर का कार्यक्रम बहुत तेज़ी से पनप रहा है,
जो शासन के मंशानुरूप नही…..

वहीं युक्त व्यक्ति की देहांत हो गई लेकिन यदि अस्पताल प्रशासन ऐसी लापरवाही नही बरतते तो शायद परिजनों को एक्सिडेंटल बीमा का लाभ मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती….।

 

बहरहाल मामले में खंड चिकित्सा अधिकारी से संपर्क किया गया मामले की तह तक जाने की कोशिश की गई लेकिन आधिकारी द्वारा फाइल देखना और जानकारी नहीं दे सकते कहकर अपना पल्ला झाड़ते नज़र आए,

इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मामले में शिकायत आधिकारी को प्राप्त है लेकिन ज़िम्मेदार आधिकारी की उदासीनता के चलते कर्मचारियों बेखौफ होकर रेफर रेफर का खेला खेल रहे हैं,इस मामले को लेकर धमतरी जिला में बड़ी कार्यवाही देखने को मिली है


बहरहाल देखना होगा कि इस मामले को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गुरूर के आधिकारी कितनी गंभीर दिखाई देते हैं और मामले में संलिप्त कर्मचारियों पर किस तरह की कार्यवाही होती है या यूं ही इन्ही ज़िम्मेदार आधिकारी के संरक्षण में निजी अस्पतालों में रेफर रेफर का खेल निरंतर जारी रहता है देखने वाली बात रहेगी.?.?.?.??.


हालांकि इस मामले में आगामी विधानसभा दौरा कार्यक्रम में शिकायत की तैयारी है।

चुनेश साहू 7049466638

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