
धमतरी । चुनेश साहू
राजस्व विभाग में जब कर्तव्यनिष्ठा और विवादों का मेल होता है, तो प्रशासनिक गलियारे चर्चाओं से गर्म हो जाते हैं। ताजा मामला धमतरी जिले का है, जहाँ भखारा तहसील को कलेक्टर अबिनाश मिश्रा द्वारा शासकीय भूमि के संरक्षण और संवर्धन में ‘उत्कृष्ट’ कार्य के लिए शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। एक ओर जहाँ प्रशासन इसे प्रेरणादायक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर तहसील में लंबित गंभीर कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों ने इस सम्मान समारोह की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जिले के जागरूक नागरिकों और जानकारों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह सम्मान वास्तव में कार्य के आधार पर है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण काम कर रहा है।

भखारा तहसील की कार्यप्रणाली पर नजर डालें तो यहाँ की तस्वीर कलेक्टर की प्रशंसा के ठीक उलट नजर आती है। यह वही तहसील है जो पिछले कई वर्षों से सबसे विवादित तहसीलों की सूची में शीर्ष पर सुर्खियां बटोरती रही है ।
ग्राम सिहाद का मामला इसका जीवंत उदाहरण है, जहाँ पौने दो एकड़ की पक्की सरकारी सड़क को पटवारी की मिलीभगत से एक निजी व्यक्ति को बेच दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि तमाम शिकायतों के बावजूद आज तक इस सड़क को सरकारी रिकॉर्ड में वापस दर्ज नहीं किया जा सका है और यह अभी भी निजी संपत्ति के रूप में प्रदर्शित हो रही है।
इसी तरह ग्राम कोसमर्रा में कोटवारी (ग्राम नौकर) की करीब सवा एकड़ भूमि को सांठगांठ कर बेच दिया गया। हालांकि इस मामले में जांच हुई और दोषी भी पाए गए, लेकिन रिकॉर्ड में सुधार करने के बजाय इसे हस्तांतरणीय घोषित कर इतिश्री कर ली गई।
तहसील की संवेदनहीनता का आलम यह है कि न्याय न मिलने से हताश होकर एक व्यक्ति ने कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह की कोशिश तक की थी, जो आज छह साल बीतने के बाद भी अदालतों के चक्कर काट रहा है। इतना ही नहीं, भखारा तहसील में ‘चमत्कारी’ राजस्व कार्यों के भी नमूने मिले हैं, जहाँ मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर जमीन का बंटवारा कर दिया गया।
आदिवासियों की भूमि की अवैध खरीदी-बिक्री हो या सिलौटी में सरकारी जमीन का घोटाला, तत्कालीन कलेक्टरों के आदेशों के बावजूद एफआईआर दर्ज करने की हिमाकत आज तक राजस्व अमला नहीं जुटा पाया है।
आपको यह भी बता दे कि ये वही तहसील है जहां पर पटवारी कार्यालय में तलसील अमला के ऊपर कार्यालय में ही शाम होते ही जाम छलकने का मामला सुर्ख़ियों में रहा है..

भखारा हाट बाजार की एक एकड़ की बेशकीमती भूमि का प्रकरण भी धूल फांक रहा है। उच्च न्यायालय बिलासपुर में मामला लंबित होने का हवाला देकर कार्रवाई रोकी गई है, जबकि न्यायालय ने केवल दो क्रेताओं को राहत दी है और कलेक्टर के पूर्व आदेशों पर कोई स्थगन नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन की ‘मेहरबानी’ के चलते दोषियों पर कार्रवाई शून्य है।
ऐसे में जुगदेही की कोटवारी भूमि के सौदों और अन्य कथित राजस्व अनियमितताओं भ्रष्टाचार के मामलों के बीच तहसीलदार को ‘सम्मानित’ किया जाना कलेक्टर की संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर भी उंगली उठा रहा है।
राजनीतिक समेत अफसरी गलियारों में यह चर्चा आम है कि क्या कुरूद के किसी प्रभाव के चलते इन विवादों पर पर्दा डालकर सम्मान की राजनीति की जा रही है। जिले के जागरूक नागरिकों का मानना है कि ऐसे सम्मान न केवल जनता का प्रशासन से विश्वास कम करते हैं, बल्कि भ्रष्टाचार में लिप्त तंत्र का मनोबल बढ़ा रहे हैं, फिलहाल धमतरी की जनता उक्त दर्शित मामलों समेत अनेकों फाइलें धुले खा रही है इसके साथ ही जिन प्रकरणों में दोषी पाए गए हैं क्या उन पर निलंबन समेत एफआईआर की कार्यवाही की जाएगी या उक्त तहसील को कोटवारी भूमि और शासकीय समेत आदिवासी भूमि खरीदी बिक्री पर कोई कार्यवाही किया जाएगा..?.?.?..?
चुनेश साहू 7049466638





