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धमतरी राज्यपाल की समीक्षा के बावजदू जल संसाधन विभाग के नहीं सुधरे हालात….

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चुनेश साहू । धमतरी 

 

 छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने रविवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ‘एक पेड़ माँ के नाम’, जल संरक्षण और स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत समीक्षा की, किंतु इस वीआईपी विमर्श के चंद कदमों की दूरी पर ही प्रशासन की विफलता का चेहरा उजागर हो रहा है। जिस धमतरी जिले को जल प्रबंधन के लिए वैश्विक पहचान और प्रधानमंत्री अवार्ड के लिए नामांकित किया गया, आज वही जिला जल संसाधन प्रबंध संभाग कोड नंबर 38 की घोर लापरवाही और अदूरदर्शिता की भेंट चढ़ गया है। राज्यपाल ने बैठक में आगाह किया कि धान की अधिक खेती और पानी की बर्बादी भविष्य में गंभीर जल संकट पैदा करेगी, लेकिन उनके इन शब्दों की स्याही सूखने से पहले ही विभागीय अधिकारियों के गैरजिम्मेदाराना रवैये ने सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

ताजा मामला शहर की फौजी कॉलोनी, गौरी नगर, कृष्ण नगर, वैभव नगर इसके साथ ही “बेंद्रा नवागांव, रूद्री, गोकुलपुर खार, भटगांव सोरम और श्यामतराई, पुरूर तक के क्षेत्र में टूटफूट होने से लाखों लीटर बर्बाद हो रहा है ,

 

जिसे विभाग की अकर्मण्यता ने तालाब, पोखरों में तब्दील कर दिया। भीषण गर्मी में तालाबों को भरने के लिए गंगरेल से निस्तारी पानी तो छोड़ा गया, लेकिन जल संसाधन प्रबंध संभाग कोड नंबर 38 के अधिकारियों ने केवल कागजों पर तालाबों का ‘निस्तारण’ कर किया जा रहा । धरातल पर केनाल और नालियां कचरे व गाद से पटी रहीं, जिसकी सफाई कराना विभाग भूल गया। परिणाम स्वरूप, पानी अपने गंतव्य तक पहुंचने के बजाय पूर रिहायशी इलाकों खाली खेतों में फैलता रहा। कुछ कॉलोनियों में सड़कें दरिया बन गई रास्तों में घुटनों तक पानी भर गया । स्थानीय निवासी नितेश साहू, लोमेश देवांगन और विजय साहू का ने कहा विभाग से बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि विभाग अपना पल्ला झाड़ता रहा। यह केवल लाखों लीटर पानी की बर्बादी नहीं है, बल्कि शासन के राजस्व को खुलेआम चूना लगाने वाला कृत्य है।कुप्रबंधन का यह खेल केवल शहर तक सीमित नहीं है,

जिला प्रशासन एक ओर ‘नारी शक्ति से जल शक्ति’ और ‘जल प्रहरियों’ के माध्यम से बूंद-बूंद बचाने का ढोंग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जल संसाधन प्रबंध संभाग कोड नंबर 38 रूद्री विभाग की आंखों के सामने लाखों लीटर पानी व्यर्थ बहकर तबाही का सबब बन रहा है। यह तत्कालीन कलेक्टर नम्रता गांधी और वर्तमान कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के ‘जल जगार’ अभियान के मंसूबों पर सीधे तौर पर पानी फेरने जैसा है।

 दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का अहंकार , जो राज्यपाल की ‘सकारात्मक कार्य’ करने की नसीहत को ठेंगा दिखा रहा है। मामले में जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी जिनका कहना है “मेरे पास दस काम हैं, यही सब देखते रहूंगा क्या… मेरे बगैर विभाग का कोई भी आदमी जानकारी नहीं देगा।” अधिकारी के इन शब्दों ने स्पष्ट कर दिया है कि विभाग को न तो जनता की परेशानी से सरोकार है और न ही शासन की योजनाओं से और न ही जल संचयन जल संरक्षण से ,उनके लिए जल संरक्षण केवल फाइलों तक सीमित है।

हालांकि कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने मामले में संज्ञान लेकर मरम्मत और मॉनिटरिंग का आश्वासन दिया है, किंतु जिस विभागीय तंत्र में अधिकारी इतने हठी हों, वहां सुधार की उम्मीद बेमानी लगती है। अब देखना होगा कि महामहिम की समीक्षा के बाद क्या धमतरी में जल संरक्षण का नारा केवल दीवार लेखन बनकर रह जाएगा या लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की जाएगी।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण अध्यक्ष खिलेंद्र ध्रुव ने कहा,…

“बेंद्रा नवागांव, रूद्री, गोकुलपुर खार, भटगांव सोरम और श्यामतराई क्षेत्र के खाली पड़े खेतों में नालियों की मरम्मत व सफाई न होने के कारण लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। वहीं खेतों में पानी भर जाने के कारण किसानों को खरीफ फसल की तैयारी करने में परेशानी हो रही है खेत में लबालब पानी होने से जमीन बर्बाद हो रहे हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है। बीते रविवार को राज्यपाल द्वारा जल संसाधन की समीक्षा किए जाने के बावजूद विभाग में कोई सुधार नहीं हुआ है, जो विभाग की लापरवाही और मनमानी को दर्शाता है। गंगरेल की धरती पर पूर्व कलेक्टर द्वारा जल संरक्षण के लिए किए गए एवं वर्तमान कलेक्टर के अथक प्रयासों को विभाग अपनी उदासीनता से व्यर्थ कर रहा है। नालियों की मरम्मत न होने के कारण बहते हुए लाखों लीटर पानी खाली खेतों में बहकर बर्बाद हो रहा है। यह स्थिति अत्यंत शर्मनाक है।”

 

“जिले में केनाल का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है तथा तालाबों की संख्या भी काफी अधिक है। जहां-जहां नालियों में टूट-फूट, क्षति या सफाई की समस्या है, वहां की विस्तृत जानकारी ली जा रही है। टीम द्वारा संबंधित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण किया जा रहा है। जहां-जहां ऐसी स्थिति है, उसे चिन्हित कर जल संसाधन विभाग को तत्काल अवगत कराया जाएगा और आवश्यक मरम्मत कार्य सुनिश्चित किया जाएगा। समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई करेंगे।”

 

 

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