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झिरिया वनग्राम में वन विभाग पर हमले का मामला गरमाया, बैगा महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप, सियासी पारा चढ़ा 

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जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़

दिनांक: 15 अप्रैल 2026

मुंगेली/लोरमी।

जिले के लोरमी विकासखंड अंतर्गत झिरिया वनग्राम में वन विभाग की टीम पर हुए हमले का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। प्रारंभिक रूप से जहां यह मामला वन विभाग पर हमले और अवैध रेत उत्खनन की कार्रवाई से जुड़ा हुआ था, वहीं अब इसमें नया मोड़ आ गया है। बैगा आदिवासी महिलाओं ने वन विभाग की टीम पर ही गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम को एक अलग दिशा दे दी है।

बताया जा रहा है कि बैगा समुदाय, जिसे देश में विशेष रूप से संरक्षित और राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र भी माना जाता है, की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि वन विभाग की टीम ने गांव में दबिश के दौरान उनके साथ मारपीट की। महिलाओं का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और भय का माहौल बनाया गया।

ग्रामीण महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने गांव में खड़े ट्रैक्टर को छोड़ने के एवज में करीब 2 लाख रुपये की मांग की। जब ग्रामीणों ने पैसे देने से इंकार किया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार और दबाव बनाया गया। इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

घटना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह पूरा मामला 10 अप्रैल की देर रात का है, जब खुड़िया रेंज की वन विभाग की टीम को झिरिया वनग्राम में अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी। सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों और वनकर्मियों के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि झड़प की स्थिति बन गई, जिसमें 4 वनकर्मी घायल हो गए। घायलों में से एक वनकर्मी की हालत अब भी गंभीर बताई जा रही है।

इस घटना के बाद वन विभाग ने दो आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

ग्रामीणों का थाने में प्रदर्शन

मामले में नया मोड़ तब आया जब सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लोरमी थाने पहुंच गए और वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर वनकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की और आरोप लगाया कि निर्दोष लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

थाने में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी बात रखते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की और चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा।

सियासी रंग चढ़ा

इस पूरे घटनाक्रम ने अब सियासी रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने ग्रामीणों के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा और व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

पुलिस का रुख

फिलहाल पुलिस ने ग्रामीणों की शिकायत दर्ज कर ली है और जांच का आश्वासन दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस अभी मीडिया से दूरी बनाए हुए है और आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर रही है।

स्थिति संवेदनशील

झिरिया वनग्राम में इस घटना के बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है।

एक ओर वन विभाग अपने कर्मचारियों पर हुए हमले को लेकर सख्त कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और बैगा समुदाय अपनी पीड़ा और आरोपों के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस जटिल मामले में किस तरह संतुलन बनाते हुए निष्पक्ष जांच कर पाता है और दोनों पक्षों को न्याय दिला पाता है।

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