hindmedianews
Breaking News
कबीरधामछत्तीसगढ़ब्रेकिंग न्यूज़भ्रष्टाचारसमस्या

हर घर जल’ के दावों की पोल: कबीरधाम में जल जीवन मिशन पर सवाल, जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में भारी अंतर

IMG-20250714-WA0596
previous arrow
next arrow

 

कवर्धा।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना को लेकर जहां एक ओर देशभर में सफलता के दावे किए जा रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से सामने आ रही वास्तविक तस्वीर इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। सरकारी प्रचार में ‘हर घर जल’ का सपना साकार होता दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं।

जिले के ग्रामीण इलाकों में करोड़ों रुपए खर्च कर सैकड़ों पानी टंकियों का निर्माण कराया गया, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में टंकियां आज भी बेकार पड़ी हैं। तकनीकी खामियों, मोटर पंप की खराबी और असफल बोर खनन के चलते कई टंकियां टेस्टिंग के बाद ही ठप हो गईं। वहीं अनेक स्थानों पर टंकियां अधूरी छोड़ दी गईं या बिना परीक्षण के ही खड़ी कर दी गईं, जिससे योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आती है।

विडंबना यह है कि सरकारी स्तर पर ‘हर घर जल’ के सफल मॉडल की कहानियां प्रस्तुत कर यह संदेश दिया जा रहा है कि हर घर तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है और महिलाओं को पानी के संकट से मुक्ति मिल गई है। लेकिन हकीकत यह है कि जिले के कई गांवों में आज भी लोग पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। यह विरोधाभास सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति के बीच गहरी खाई को दर्शाता है।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि योजना के नाम पर कागजी उपलब्धियां गढ़ी जा रही हैं। आरोप है कि ठेकेदारों, जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य कराए गए, बिना उचित परीक्षण के भुगतान किया गया और कमीशनखोरी के चलते योजना की गुणवत्ता से समझौता किया गया।

गौरतलब है कि किसी भी ग्रामीण द्वारा इस योजना की विशेष मांग नहीं की गई थी, बल्कि देश के समग्र विकास और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार स्वयं इस योजना को लागू करने के लिए बाध्य है। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी भी पूरी तरह सरकार और प्रशासन की ही बनती है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे, न कि केवल कागजों और प्रचार तक सीमित रह जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक या कुछ गांवों में योजना सफल हुई भी है, तो उसे पूरे जिले की उपलब्धि बताकर प्रचारित करना भ्रामक और वास्तविकता से परे है। जरूरत इस बात की है कि जमीनी स्तर पर व्यापक मूल्यांकन किया जाए और जहां-जहां कमियां हैं, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘जल जीवन मिशन’ केवल चुनिंदा उदाहरणों के सहारे सफलता का ढोल पीटने तक सीमित रह जाएगा, या फिर सरकार इसकी विफलताओं की जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई करेगी। यह समय है कि दावों से आगे बढ़कर हकीकत को स्वीकार किया जाए और योजनाओं को वास्तव में जनहितकारी बनाया जाए, ताकि ‘हर घर जल’ का सपना कागजों से निकलकर धरातल पर साकार हो सके।

संबंधित पोस्ट

चांदी के तस्करी पर महासमुन्द पुलिस की कार्यवाही,29 किलो से अधिक की चांदी जप्त 

hindmedianews

वन विभाग ने की भेड़ बकरी चरवाहों पर कार्यवाही, विभाग द्वारा कराए गए गुणवत्ता हीन निर्माण कार्यों पर नही ध्यान

hindmedianews

जिला प्रशासन पर सवाल:अधीक्षक नदारद,बिना लिखित आदेश छात्रों को दी गई छुट्टी,आदिवासी बालक आश्रम में जड़ा ताला

hindmedianews

सरणीकरण के बाद जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 01 से 14 तक का परिणाम विधिवत रूप से घोषणा

Sakshi Bansod

अवैध शराब पर कबीरधाम पुलिस की प्रभावी कार्यवाही, 39 पौवा शराब जब्त

Sakshi Bansod

डालामौहा पंचायत भवन में गंदगी और अव्यवस्था का आलम, भ्रष्टचार की बू आ रही इस पंचायत में 

hindmedianews