कार्यक्रम अधिकारी पर गंभीर सवाल, कानून को ठेंगा दिखाकर चल रहा भ्रष्टाचार का खुला तंत्र
अजय जांगड़े कवर्धा। पंडरिया जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रमतला इन दिनों महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम पर चल रहे कथित भ्रष्टाचार का केंद्र बनता जा रहा है। यहां जिस तरह नियम-कानूनों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। रमतला पंचायत: जहां कानून नहीं, मनमानी चलती है ग्राम पंचायत रमतला में मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों में खुलेआम मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से खुदाई और निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, जबकि कानून स्पष्ट रूप से इसकी मनाही करता है। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे-सीधे कानून को चुनौती देने जैसा है—और यह सब बेखौफ होकर हो रहा है। मनरेगा अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका को लेकर उठ रहा है। बिना उनकी जानकारी और स्वीकृति के इतनी बड़ी अनियमितताएं संभव नहीं मानी जा सकतीं। सूत्रों की मानें तो अधिकारी की कथित “मौन सहमति” से ही पंचायत स्तर पर मशीनों से कार्य कराए जा रहे हैं और कागजों में मजदूरों की फर्जी हाजरी भरकर भुगतान निकाला जा रहा है। यह स्थिति सीधे-सीधे मिलीभगत की ओर इशारा करती है। फर्जी मस्टर रोल: कागजों में रोजगार, जमीन पर शून्य रमतला में मजदूरों के नाम पर मस्टर रोल भरे जा रहे हैं, लेकिन असलियत में मजदूरों को काम ही नहीं मिल रहा। मशीनें काम कर रही हैं और मजदूरों के नाम पर पैसा निकाला जा रहा है। यह न केवल सरकारी धन की खुली लूट है, बल्कि गरीब मजदूरों के अधिकारों का संगठित हनन है। प्रशासन को ठेंगा, नियमों की धज्जियां सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। जनपद स्तर पर निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। यह चुप्पी अब लापरवाही नहीं, बल्कि संलिप्तता की ओर इशारा करती है। रमतला बना “भ्रष्टाचार मॉडल” जहां मनरेगा का उद्देश्य रोजगार देना था, वहीं रमतला में यह योजना भ्रष्टाचार का जरिया बन चुकी है। मजदूर बेरोजगार हैं, गांव से पलायन बढ़ रहा है, और विकास का पैसा कुछ लोगों की जेब में जा रहा है। अब कार्रवाई नहीं, तो जवाबदेही तय हो यह मामला अब गंभीर आर्थिक अनियमितता और कानून के उल्लंघन का बन चुका है। जरूरी है कि— रमतला पंचायत के सभी मनरेगा कार्यों की उच्च स्तरीय जांच हो संबंधित कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका की स्वतंत्र जांच कर तत्काल हटाया जाए फर्जी मस्टर रोल की जांच कर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं मशीनों से कराए गए कार्यों की भुगतान प्रक्रिया रोकी जाए सरकार के लिए सीधी चुनौती रमतला पंचायत का यह मामला अब प्रशासन और सरकार के लिए सीधी चुनौती बन चुका है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश जाएगा कि कानून केवल कागजों तक सीमित है और भ्रष्टाचार को खुली छूट मिली हुई है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और सरकार इस मामले में सख्ती दिखाते हैं या फिर रमतला जैसे उदाहरण पूरे सिस्टम को बदनाम करते रहेंगे।