
अजय जांगड़े 8085164784
कवर्धा,गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व पर जब पूरा देश तिरंगे के सम्मान में नतमस्तक होता है, तब जिला मुख्यालय कवर्धा स्थित आचार्य पंथ श्री गृंध मुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मैदान में आयोजित जिला स्तरीय समारोह ने प्रशासनिक संवेदनहीनता की ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने पूरे आयोजन की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग मंत्री एवं कबीरधाम जिले के प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने पूरे विधि-विधान के साथ तिरंगा फहराया, परेड की सलामी ली, आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़े और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जनता के नाम संदेश वाचन किया। मंच पर सब कुछ अनुशासित और औपचारिक दिखा—लेकिन मंच से कुछ ही कदम दूर स्वागत द्वार पर भिक्षा मांगने वालों की कतार खड़ी थी।
यह दृश्य मात्र एक अव्यवस्था नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है।
प्रश्न सीधा है—
क्या यह नगर पालिका परिषद कवर्धा की घोर लापरवाही है?
या फिर जिला प्रशासन की आंखों पर बंधी उदासीनता की पट्टी?
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर, जहां सुरक्षा, स्वच्छता और गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए, वहां स्वागत गेट पर यह हालात न सिर्फ प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करते हैं, बल्कि यह मुख्य अतिथि और जनप्रतिनिधि की अप्रत्यक्ष अवमानना भी है। मंत्री मंच पर खड़े होकर संविधान और लोकतंत्र की बात कर रहे थे, और नीचे व्यवस्था खुद सवालों के कटघरे में खड़ी थी।
यह चूक छोटी नहीं है।
यह चूक बताती है कि फाइलों में व्यवस्था है, ज़मीन पर नहीं।
यह चूक बताती है कि औपचारिकता निभाई गई, जिम्मेदारी नहीं।
कबीरधाम जिले की छवि पर यह एक काला धब्बा है, और नगर पालिका परिषद कवर्धा सहित संबंधित प्रशासनिक अमले को यह आत्ममंथन करना होगा कि आखिर राष्ट्रीय पर्व भी अगर अव्यवस्था से अछूते नहीं रहे, तो आम दिनों की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
गणतंत्र दिवस केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं,यह सम्मान,संवेदना और सिस्टम की परीक्षा होता है।
और इस परीक्षा में कवर्धा की व्यवस्था फेल होती दिखी।





