
कलेक्टर का आदेश बेअसर:
किसान 10 माह से परेशान.. पटवारी चढ़ावे के इंतजार में
चुनेश साहू । धमतरी
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक पटवारी ने तत्कालीन कलेक्टर द्वारा पारित विधिवत आदेश को दरकिनार करते हुए एक किसान से उसकी खरीदी हुई भूमि का रिकॉर्ड सुधारने के लिए कथित तौर पर मोटी रिश्वत की मांग की है। यह मामला कुकरेल तहसील के ग्राम छूही का है, जहां एक किसान (बनावटी नाम) धन्नू पिता गणेश साहू अपनी खरीदी गई 16 डिसमिल भूमि के बंदोबस्त त्रुटि सुधार के लिए पिछले 10 माह से कलेक्टर कार्यालय और तहसील के चक्कर लगा रहे हैं।
धन्नू ने अपनी बंदोबस्त पूर्व खरीदी भूमि, जो मूल रूप से खसरा नंबर (बनावटी/उदाहरण मात्र) 1470 में दर्ज थी, को रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए तहसीलदार कुकरेल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। स्थल जांच के बाद राजस्व निरीक्षक ने प्रतिवेदन दिया कि किसान का कब्ज़ा नए सर्वे नंबर(बनावटी/काल्पनिक) 1026 रकबा 0.09 हेक्टेयर में से 0.06 हेक्टेयर पर है। चूंकि यह नया सर्वे नंबर शासकीय भूमि ‘पहाड़ चट्टान’ मद में दर्ज था, इसलिए तत्कालीन तहसीलदार ने प्रकरण को कलेक्टर के पास प्रेषित किया। धमतरी की तत्कालीन कलेक्टर नम्रता गांधी ने किसान को न्याय देते हुए दिनांक(उदाहरण मात्र) 07/02/2025 को बंदोबस्त में हुई त्रुटि को सुधारने का स्पष्ट आदेश पारित किया। इस आदेश के बाद तहसीलदार कुकरेल ने 28/07/2025 को पटवारी के लिए ज्ञापन जारी कर आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया।
विडंबना यह है कि पटवारी श्री श्री श्री माली ने कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद 10 माह बीत जाने पर भी किसान के अभिलेखों में सुधार नहीं किया। किसान के अनुसार, पटवारी लगातार कलेक्टर के आदेश को ‘त्रुटिपूर्ण’ बताकर उन्हें टालता रहा और अनावश्यक रूप से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगवाता रहा। किसान ने यह भी बताया कि वे सुधार कार्य के लिए ₹4-5 हजार तक देने को तैयार थे, लेकिन पटवारी श्रीमाली ने अधिक मोटी रकम मांग करते हुए तर्क दिया कि मामला शासकीय भूमि से जुड़ा है और तहसीलदार को भी देना होगा।
राजस्व के जानकार वकीलों का मत है कि पटवारी को कलेक्टर के आदेश का पालन करना अनिवार्य है। नियमानुसार, कलेक्टर के आदेश में तहसीलदार को खसरा नंबर 1026 को विभाजित कर खसरा नंबर 1026/1 (0.03 हेक्टेयर शासकीय मद) और खसरा नंबर 1026/2 (0.06 हेक्टेयर आवेदक धन्नूराम के नाम भूमिस्वामी) करने का ज्ञापन जारी करना था, जिसका पालन पटवारी द्वारा तत्काल किया जाना चाहिए था। किसान ने बताया कि पटवारी की मनमानी का एक कारण ग्राम छूही निवासी रम्भाबाई का भी इसी खसरे पर कब्ज़ा होने का दावा था। हालांकि, रम्भाबाई का आवेदन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नगरी द्वारा 12/11/2025 को अपील में खारिज कर दिया गया। इसके बाद ही पटवारी श्री श्री श्री माली ने किसान से मोटी रकम मांगते हुए अभिलेख सुधारने और यहां तक कि किसान का धान भी इस भूमि पर बिकवाने का आश्वासन दिया। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि निचले स्तर पर अधिकारी किस प्रकार सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के आदेश को भी रिश्वतखोरी के लिए हथियार बनाकर किसान को प्रताड़ित कर रहे हैं।
टीप: उक्त प्रकरण पूर्णतः काल्पनिक है वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है यह
चुनेश साहू 9111988965





