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अन्नदाता के साथ अन्याय: धान उपार्जन केंद्र पाढ़ी में कर्मचारियों की मनमानी, किसानों को घंटों इंतजार

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कवर्धा। जिले के धान उपार्जन केंद्र पाढ़ी में इस सीजन भी अव्यवस्था अपने चरम पर है। केंद्र में तैनात खरीदी प्रभारी और ऑपरेटरों की मनमानी का आलम यह है कि किसानों को सुबह से लाइन में खड़े रहना पड़ता है, लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। नतीजा—अन्नदाता घंटों तक प्रतीक्षा कर परेशान होते रहते हैं, और खरीदी प्रक्रिया लगातार लटकती रहती है।

किसानों का कहना है कि उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर कर्मचारी मनमर्जी चला रहे हैं। यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया न केवल शासन की छवि खराब करता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नसों पर चोट भी पहुंचा रहा है।

समय पालन में लापरवाही, कर्मचारियों की अनुपस्थिति बनी सिरदर्द

सूत्र बताते हैं कि पाढ़ी केंद्र में कई बार ऑपरेटर और खरीदी प्रभारी समय पर मौजूद ही नहीं रहते। कृषि उपज लाने वाले किसान अपने ट्रैक्टर व वाहन लेकर घंटों धूप में इंतजार करते हैं, लेकिन अधिकारियों-संबंधित कर्मचारियों की ढीली कार्यशैली किसानों के धैर्य की परीक्षा लेती रहती है।

क्या किसानों से जबरन वसूली की तैयारी?

स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि फसल में अनावश्यक कमी निकालने, या जल्दी खरीदी कराने के नाम पर कमीशन मांगने की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं।

यह सवाल उठता है कि ,क्या अन्नदाता को परेशान कर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश हो रही है?

अगर ऐसा है तो यह किसानों के सम्मान पर सीधा प्रहार है।प्रशासन की चुप्पी भी संदेह के घेरे में

जब एक पूरा वर्ग लगातार प्रताड़ित हो रहा है, तब भी संबंधित विभाग या अधिकारी कार्रवाई को लेकर गंभीर नहीं दिखाई देते। यह ढिलाई किसानों के बीच असंतोष को बढ़ा रही है। प्रशासन अगर समय रहते इस अव्यवस्था पर नकेल नहीं कसता तो किसानों का गुस्सा बड़ा रूप लेकर सरकार की नींव तक हिला सकता है।

कड़े निर्देश और निगरानी की जरूरत

आवश्यक है कि जिला प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर खरीदी केंद्रों पर कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति,पारदर्शी वजन प्रक्रिया,अवैध वसूली पर रोक,दैनिक निगरानी व्यवस्था

सुनिश्चित करे, ताकि अन्नदाता सम्मानित महसूस करें। सरकार के लिए यह केवल खरीदी प्रक्रिया नहीं बल्कि किसान विश्वास की परीक्षा है।

अगर किसानों की पीड़ा को अनसुना किया गया, तो इसकी गूंज आने वाले समय में सत्ता गलियारों तक सुनाई देगी।

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