
बीजापुर।
जिले के शासकीय स्कूलों में इन दिनों एक नया आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब स्कूल परिसर में आने वाले आवारा कुत्तों की निगरानी की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी गई है। ‘डॉग वॉच’ नामक इस नई प्रणाली के तहत शिक्षकों को स्कूल समय में परिसर का निरीक्षण कर कुत्तों की उपस्थिति, उनके व्यवहार और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी प्रतिदिन दर्ज करनी होगी।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर उठाया गया कदम
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बीते महीनों में कई स्कूलों में आवारा कुत्तों के प्रवेश और बच्चों को डराने की घटनाएं सामने आईं थीं। कुछ जगहों पर हल्के-फुल्के हमले भी हुए। इसी को देखते हुए स्कूल सुरक्षा मानकों के तहत यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को टाला जा सके।
उन्होंने बताया कि शिक्षक प्रतिदिन अलग-अलग समय पर निगरानी रखें, कुत्तों के व्यवहार पर रिपोर्ट तैयार करें और जरूरत पड़ने पर नगर पालिका या पंचायत से कुत्ता पकड़ने की टीम बुलाने की प्रक्रिया प्रारंभ करें।
शिक्षक बोले— “पढ़ाई छोड़, अब कुत्तों पर नजर रखें क्या?”
आदेश जारी होते ही जिले के शिक्षक संगठनों में नाराज़गी फैल गई है। शिक्षकों का कहना है कि
पहले से ही उन्हें पढ़ाई के साथ कई गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपे जाते हैं,
चुनाव ड्यूटी, सर्वे, पोषण अभियान, पंजीयन, ऑनलाइन अपडेट जैसे कामों के अलावा
अब कुत्तों की निगरानी जैसे दायित्वों का बोझ बढ़ाना उचित नहीं है।
कुछ शिक्षकों ने तंज कसते हुए कहा—
“हम शिक्षा देने आए हैं, सुरक्षा गार्ड
या पशु निरीक्षक बनने नहीं।”
“स्कूलों में चौकीदार या गेटकीपर हों, तभी संभव”— संगठन
शिक्षक संगठनों ने सुझाव दिया कि यदि सरकार को ‘डॉग वॉच’ को मजबूती से लागू करना है, तो प्रत्येक स्कूल में चौकीदार या गेटकीपर की नियुक्ति आवश्यक है। शिक्षकों का कहना है कि वे पढ़ाई से समय निकालकर कुत्तों का पीछा नहीं कर सकते, विशेषकर ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों के स्कूलों में जहां जानवरों का आना आम बात है।
पालक भी चिंतित, बोले— “बच्चों की सुरक्षा जरूरी, पर समाधान व्यावहारिक हो”
कुछ पालकों का मानना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्कूलों में डॉग वॉच से घटनाएं कम हो सकती हैं, पर इसके लिए शिक्षकों पर बोझ बढ़ाना उचित नहीं लगता।
विभाग ने कहा— “अस्थायी व्यवस्था”
शिक्षा विभाग के अधिकारी इस आदेश को अस्थायी व्यवस्था बताते हैं। उनका कहना है कि जल्द ही स्थानीय निकायों के साथ बैठक कर स्थायी समाधान तैयार किया जाएगा। फिलहाल बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
निष्कर्ष
बीजापुर में ‘डॉग वॉच’ अभियान जहां स्कूल सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जा रहा है, वहीं शिक्षकों का बढ़ता कार्यभार और विरोध इसे विवाद का विषय बना रहा है। आने वाले दिनों में विभाग इस पर क्या सुधार करता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।





