
अजय जांगड़े 8085164784
कवर्धा/पंडरिया।पंडरिया क्षेत्र में अवैध जुआ संचालन की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है। लगातार शिकायतों, चर्चाओं और बढ़ते विवादों के बावजूद जुआ संचालन पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। जुआ चलाने वाले गिरोह इतने सक्रिय और संगठित हो चुके हैं कि वे पुलिस की मौजूदगी को धता बताते हुए रोज़ाना नए-नए ठिकानों पर लाखों रुपये का खेल संचालित कर रहे हैं।
दैनिक कमाई से बढ़ रही चर्चाएँ, पुलिस पर उठ रहे गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जुआरियों की यह कमाई प्रतिदिन लाखों में पहुँच चुकी है। कई लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम का प्रवाह बिना संरक्षण के संभव नहीं है। लगातार यह चर्चा भी तेज है कि कहीं न कहीं कुछ सरकारी अधिकारियों से लेकर राजनीतिक रसूखदारों तक इस अवैध कमाई का हिस्सा पहुँच रहा है। इसी वजह से जुआ संचालन पर रोक लगाने के बजाय पुलिस “कठपुतली” बनी नजर आ रही है।
जगह बदल-बदलकर चल रहा खेल
जुआ संचालक इतने चालाक और संगठित हैं कि वे हर दूसरे दिन अपने ठिकाने बदल लेते हैं। इससे ग्रामीणों में भ्रम और दहशत का माहौल बन गया है। लोग बताते हैं कि एक स्थान पर पुलिस पहुंचती भी है तो वहीं दूसरी जगह उसी रात जुआ रात भर चलता रहता है।
इन क्षेत्रों में सबसे अधिक सक्रियता: ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर जिन स्थानों पर अवैध जुआ सबसे अधिक चलने की शिकायतें मिल रही हैं, वे इस प्रकार हैं।
पाढ़ी रोड स्थित ईंट भट्टों का क्षेत्र
बिरकोना के आसपास खेत-खलिहान एवं सुनसान स्थान
कुशाल बंदपारा की नहर किनारे खुला मैदान
नवापारा के खेत, खलिहान और कुछ निजी घर
गोपीबंद पारा के कई मकान जहाँ रात देर तक भीड़ जुटती है
महामाया मंदिर के आसपास के कुछ संवेदनशील क्षेत्र
इसके अलावा कुछ राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों के घरों में भी गतिविधियाँ होने की चर्चा । इन स्थलों पर देर शाम से लेकर रात के अंतिम पहर तक आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय युवाओं से लेकर बाहरी तत्वों तक की आवाजाही बढ़ने से क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियाँ भी बढ़ने लगी हैं।
स्थानीय नागरिकों की आवाज़ अब कोई जगह सुरक्षित नहीं
कई ग्रामीणों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि अवैध जुआ संचालन के कारण गांवों में अपराध का खतरा बढ़ रहा है। चोरी, मारपीट, विवाद, नशाखोरी और कर्जबाजारी जैसी समस्याएँ भी तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि “अब पंडरिया में शायद ही कोई जगह अछूती बची हो जहाँ जुआरियों का नेटवर्क न हो।”
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल—क्या जानबूझकर अनदेखी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गांवों में जुआ संचालन से लेकर उसकी कमाई की चर्चा आम लोगों तक में है, तो पुलिस-प्रशासन इसे क्यों नहीं देख पा रहा? यह अनदेखी है, उपेक्षा है या फिर कोई अदृश्य संरक्षण—इस पर क्षेत्र में चर्चाएँ गर्म हैं।
कानून-व्यवस्था को भारी खतरा, जनता ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से कठोर कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध नेटवर्क पर लगाम नहीं लगी, तो अपराध के और बड़े रूप सामने आ सकते हैं। युवाओं पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है और गांवों का सामाजिक वातावरण बिगड़ता जा रहा है।
जनता की अपील कि पुलिस तत्काल कड़ाई करे
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि अब सिर्फ छोटी-मोटी कार्रवाई से कुछ नहीं होगा। जुआ संचालकों, उनके संरक्षकों और शामिल दलों पर बड़ी कार्रवाई ही इस समस्या को रोक सकती है। क्षेत्र के लोगों ने साफ कहा है कि वे चाहते हैं कि पंडरिया में शांति, कानून और व्यवस्था कायम रहे, लेकिन इसके लिए प्रशासन को तुरंत निर्णायक कदम उठाने होंगे। पंडरिया क्षेत्र अवैध जुआ की गिरफ्त में है और अब जनता इस अवैध गतिविधि पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन की सख्त कार्रवाई की प्रतीक्षा में है।





