
निर्माण कार्य 16 करोड़ की लागत से जारी, लेकिन प्रगति बेहद धीमी
स्थानीय रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य को शुरू हुए पूरे दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी निर्माण अधूरा पड़ा है। यात्रियों को प्रतिदिन बदहाल सुविधाओं, असुविधाजनक प्लेटफार्म, और अव्यवस्थित आवागमन का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण कार्य की लागत 16 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन धीमी गति से काम होने के कारण प्रोजेक्ट लगातार लटकता नजर आ रहा है।
यात्रियों को भारी दिक्कतें प्लेटफार्म पर छाया और बैठने की व्यवस्था अधूरी टिकट काउंटर के आसपास अव्यवस्था मरम्मत के कारण ट्रेनों के आवागमन में देरी रात में रोशनी की कमी से सुरक्षा को लेकर चिंता
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रेलवे प्रशासन बार-बार नई समयसीमा घोषित कर रहा है, लेकिन काम की वास्तविक रफ्तार बेहद सुस्त है। कई यात्रियों ने स्टेशन परिसर में चल रहे कार्य को “अधूरा और अस्त-व्यस्त” बताया।
ठेकेदार और विभाग पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य में सामग्री आपूर्ति और ठेकेदार बदलने जैसी वजहों से देरी हुई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि “तकनीकी कारणों” से काम अपेक्षित समय में पूरा नहीं हो पाया।
कब तक पूरा होगा काम?
रेलवे विभाग के अनुसार अब प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और स्टेशन को अगले कुछ महीनों में यात्रियों के लिए पूरी तरह तैयार करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, लोगों में इस दावे को लेकर संदेह बना हुआ है।
निष्कर्ष
दो साल का लंबा इंतजार और 16 करोड़ की भारी लागत के बावजूद रेलवे स्टेशन अधूरा पड़ा है। यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है और अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्यशैली पर टिकी हैं कि आखिर स्टेशन का काम कब तक पूरा होगा।





