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छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ सकती है वन क्षेत्रों से घिरे राज्य को अतिरिक्त समय देना आवश्यक — कांग्रेस

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए चल रही स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य के कई जिलों में भौगोलिक परिस्थितियों, वन क्षेत्रों की विशालता और दुर्गम इलाकों को ध्यान में रखते हुए समय-सीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि राज्य की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए SIR प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि हर पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल हो सके और किसी भी परिवार का लोकतांत्रिक अधिकार न छूटे।

दुर्गम क्षेत्रों में चुनौतियों का हवाला, कांग्रेस ने कहा — “समय कम, काम ज्यादा”

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ की लगभग आधी आबादी जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहती है। बस्तर, सरगुजा, कांकेर, नारायणपुर, गरियाबंद, कोरबा और जशपुर जैसे जिलों में बीएलओ को गाँव-गाँव, घर-घर पहुँचने में काफी समय लगता है। कई इलाकों में सड़कों की दिक्कत, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और लंबी दूरियों के कारण गणना कार्य में अतिरिक्त समय की जरूरत स्वाभाविक है।पार्टी ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय-सीमा में सभी पात्र मतदाताओं तक पहुँचना संभव नहीं है, और जल्दबाज़ी में तैयार सूची भविष्य में विवाद और असंतोष का कारण बन सकती है।

वर्तमान समय-सारणी: कहाँ तक पहुँचा काम?

बीएलओ द्वारा घर-घर सर्वे:

4 नवंबर से 4 दिसंबर तक

राज्यभर में बीएलओ बूथ स्तर पर घर-घर जाकर गणना फॉर्म वितरित कर रहे हैं। कई जिलों में कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि दूरस्थ इलाकों में बीएलओ को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मसौदा मतदाता सूची प्रकाशन:

9 दिसंबरनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 9 दिसंबर को मसौदा सूची प्रकाशित की जाएगी। इसी दिन से आम नागरिकों के लिए अपनी जानकारी सत्यापित करने का अवसर प्रारंभ होगा।

दावे और आपत्तियाँ:

9 दिसंबर से 8 जनवरी तक

राज्य निर्वाचन कार्यालय की ओर से तय समय के अनुसार नागरिक 9 दिसंबर से 8 जनवरी तक नए नाम जोड़ने, गलत जानकारी सुधारने और मृतकों के नाम हटाने जैसी आपत्तियाँ एवं दावे दर्ज कर सकेंगे।

कांग्रेस का तर्क: “छत्तीसगढ़ विशेष भू-गोल वाला राज्य है, अतिरिक्त समय जरूरी”

कांग्रेस ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि:राज्य का 44% हिस्सा जंगलों से घिरा हैकई गाँव सड़क संपर्क से अभी भी वंचित हैंनक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की अतिरिक्त चुनौतियाँ हैं गर्मी, ठंड और लंबी दूरी के कारण बीएलओ के लिए कठिनाई बढ़ जाती हैइन सभी कारणों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि समय-सीमा बढ़ेगी तो मतदाता सूची अधिक मजबूत और त्रुटि-रहित बनेगी।

चुनाव आयोग क्या करेगा?

राजनीतिक नज़रें आयोग के निर्णय पर टिकीं

चुनाव आयोग की ओर से अभी तक समय-सीमा बढ़ाने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि राज्य से रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग स्थिति की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त समय देने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

यदि समय-सीमा बढ़ती है, तो राज्यभर में बीएलओ को राहत मिलेगी और व्यापक मतदाता कवरेज सुनिश्चित हो सकेगा।

राजनीतिक माहौल गरम, मतदाता जागरूकता पर जोर

इस बीच सभी राजनीतिक दल जनता से अपील कर रहे हैं कि:

अपने परिवार के सभी सदस्यों के नाम सूची में अवश्य जाँचें

युवा मतदाता 18 वर्ष पूरा करते ही अपना नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी करें बीएलओ के साथ सहयोग करें और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध करवाएँराज्य में इस प्रक्रिया के चलते राजनीतिक माहौल गर्म है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

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