
अजय जांगड़े 08085164784
कवर्धा,छत्तीसगढ़ की राजनीतिक यात्रा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आगमन एक ऐसा ऐतिहासिक अवसर रहा जिसने प्रदेश की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया। वाजपेयी जी का छत्तीसगढ़ आगमन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इस क्षेत्र की चेतना को जागृत करने वाला आंदोलन बन गया।
साल 1960 के दशक में जब अटल जी पहली बार तत्कालीन मध्यप्रदेश के बिलासपुर और रायपुर क्षेत्रों में भारतीय जनसंघ के संगठनात्मक कार्यक्रमों के तहत पहुँचे, तब छत्तीसगढ़ को राज्य के सबसे पिछड़े और उपेक्षित क्षेत्रों में गिना जाता था। उस दौर में यहाँ न तो औद्योगिक विकास हुआ था, न ही राजनीतिक भागीदारी का विस्तार। परंतु वाजपेयी जी के आगमन ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा दी।
जनसंघ के कार्यक्रमों से शुरू हुआ संवाद
अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ की माटी से संवाद साधते हुए यहाँ के किसानों, मजदूरों और युवाओं को संगठन के साथ जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने उस समय के अपने भाषणों में बार-बार कहा था कि :
“जिस दिन छत्तीसगढ़ की आवाज़ गूंजेगी, उस दिन देश की राजनीति बदलेगी।”
उनके इस संदेश ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं में नई चेतना का संचार किया। वाजपेयी जी की सरल भाषा, सौम्य व्यक्तित्व और ओजस्वी वक्तृत्व ने छत्तीसगढ़ के लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ी।
राज्य निर्माण की नींव पड़ी
वर्षों बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने अपने उसी वचन को पूरा किया जो उन्होंने इस क्षेत्र की जनता से किया था। उन्होंने एक सभा में कहा था —
“आप मुझे ग्यारह सांसद दीजिए, मैं आपको छत्तीसगढ़ दूँगा।”
जनता ने उन्हें पूरा विश्वास दिया, और 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस दिन को छत्तीसगढ़ की जनता आज भी “अटल दिवस” के रूप में याद करती है, क्योंकि यह उनके उस वचन की परिणति थी जो उन्होंने दशकों पहले यहाँ आकर दिया था।
जनता के दिल में अमर नाम
छत्तीसगढ़ के लोग आज भी वाजपेयी जी को “छत्तीसगढ़ राज्य के जनक” के रूप में सम्मान देते हैं। रायपुर से लेकर बिलासपुर, कवर्धा से अंबिकापुर तक उनके आगमन से जुड़ी यादें आज भी बुजुर्गों की जुबान पर जीवित हैं।
कई शैक्षणिक संस्थान, सड़कें और योजनाएँ उनके नाम पर हैं — जिनमें अटल नगर (नया रायपुर), अटल आवास योजना, और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर प्रमुख हैं।
एक प्रेरणा, जो अब भी जीवित है
अटल बिहारी वाजपेयी का छत्तीसगढ़ से रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि आत्मीय था। उन्होंने इस माटी की पीड़ा को समझा और विकास का सपना देखा। आज भी जब राज्य स्थापना दिवस मनाया जाता है, तो जनता के बीच उनका नाम श्रद्धा और गौरव के साथ लिया जाता है।
निष्कर्षतः, अटल जी का छत्तीसगढ़ में पहला आगमन एक ऐसी घटना थी जिसने इस क्षेत्र की राजनीति को नई दिशा दी। उनके विचार, उनकी दूरदृष्टि और उनके वचन ने न केवल राज्य की नींव रखी, बल्कि लोगों के दिलों में विश्वास जगाया कि नेतृत्व केवल सत्ता नहीं, सेवा का नाम है।प





