
अजय जांगड़े
कबीरधाम। गृह मंत्री के गृह जिले में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में अपराध मामलों में पुलिस द्वारा चलान (चार्जशीट) पेश करने में लगातार देरी की जा रही है। पीड़ित पक्ष न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं, लेकिन पुलिस तंत्र की सुस्ती ने न्याय की प्रक्रिया को ठहर सा दिया है।
जानकारी के अनुसार, कई मामलों में अपराध पंजीबद्ध होने के बाद भी विवेचना पूरी नहीं की जा रही। न तो जांच में तेजी दिखाई जा रही है और न ही न्यायालय में चलान पेश हो पा रहा है। ऐसे में अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित पक्ष न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
⚖️ प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
कानूनी प्रक्रिया को समय पर पूर्ण न करना पुलिस की गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। यह स्थिति न केवल पीड़ित और आरोपी दोनों के अधिकारों का हनन कर रही है, बल्कि शासन और प्रशासन की साख पर भी धब्बा लगा रही है।
जनता पूछ रही है —
“जब गृह मंत्री के ही जिले में पुलिस इतनी लापरवाह है, तो राज्य के बाकी जिलों में हालात कैसे होंगे?”
न्याय व्यवस्था पर पड़ रहा नकारात्मक असर
पुलिस द्वारा शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई से पीछे हटना और जांच में ढिलाई बरतना पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
यदि अपराध की विवेचना और निराकरण समय पर नहीं हुआ, तो यह न केवल न्याय में देरी बल्कि न्याय से वंचित होने की स्थिति पैदा करेगा।
कबीरधाम की जनता अब उम्मीद लगाए बैठी है कि शासन इस लापरवाही पर संज्ञान लेकर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करेगा, ताकि न्याय की प्रक्रिया फिर से पटरी पर लौट सके।





