
**जादुई जंगल का संविदा राजा और चमकता ठग: रहस्यमयी तख्त का खेल!**
—कब खुलेगा यह जादुई पर्दा!
छग/धमतरी
एक बार की बात है, एक हरे-भरे जादुई जंगल में, जहां पेड़ सोने की पत्तियों से लदे थे और नदियाँ चांदी की चमक बिखेरती थीं। इस जंगल का शासन एक शक्तिशाली रानी, जिसे लोग “स्वर्णमयी” कहते थे, के हाथों में था। स्वर्णमयी की ताकत उसकी जादुई कलम में थी, जो एक लहर से कानून बना देती और दूसरी लहर से उसे मिटा देती। जंगल के सभी प्राणी उसकी आज्ञा मानते थे, और उसकी सलाहकार सभा में बुद्धिमान सियार, चतुर हिरण और दूरदर्शी उल्लू शामिल थे। लेकिन एक दिन, इस शांतिपूर्ण जंगल में एक नया किरदार आया—एक चमकता हुआ ठग, जिसे “रंगीन चालक” कहा जाता था।
रंगीन चालक का आगमन अनोखा था। उसने अपनी जादुई पतंग से आकाश में उड़ते हुए जंगल में प्रवेश किया, जिस पर रंग-बिरंगे पंख टंगे थे। उसने दावा किया कि वह जंगल का नया “सहायक रक्षक” है, जिसे स्वर्णमयी ने नियुक्त किया है। लेकिन सियारों ने फुसफुसाकर कहा, “इसकी नियुक्ति में तो जादू की गंध नहीं, सिर्फ चालबाजी की बू है!” फिर भी, स्वर्णमयी चुप रही, और रंगीन चालक ने जंगल की बागडोर अपने हाथ में ले ली। वह सभा में डंके की चोट पर बैठ गया और जादुई कलम के बिना ही फैसले सुनाने लगा।
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब रंगीन चालक ने जंगल के सोने के खजाने पर कब्जा जमा लिया। वह ठग-ठेकेदारों—जो बंदरों और साँपों की टोली थी—से चमकदार सिक्कों का सौदा करने लगा। हर पेड़ की कटाई और हर नदी के रास्ते बदलने के बदले, वह मोटी कमाई कर रहा था। सभा के सदस्य हैरान थे—उल्लू ने चीखकर कहा, “यह तो जंगल का असली राजा बन गया!” लेकिन स्वर्णमयी? वह अपनी सुनहरी गुफा में चुपचाप बैठी रही, जैसे उसकी जादुई कलम सो गई हो।
जंगल के प्राणी चर्चा करने लगे। कुछ कहते, “शायद स्वर्णमयी इस चालक से डर गई है!” तो कुछ तंज कसते, “नहीं, यह तो उसका छिपा हुआ साथी है, जो सिक्कों का बंटवारा कर रहा है!” हिरणों ने देखा कि रंगीन चालक की पतंग अब सोने के सिक्कों से लदी थी, और उसने अपनी गुफा को चांदी से सजाना शुरू कर दिया। सियारों ने शिकायत की, “हमारे जंगल का सोना चला जा रहा है, लेकिन रानी की कलम क्यों खामोश है?” स्वर्णमयी का जवाब? सिर्फ एक मुस्कान और सन्नाटा।
जंगल की सभा अब रंगीन चालक के इशारों पर नाच रही थी। उसने खुद को “छाया राजा” घोषित कर दिया, और स्वर्णमयी की सलाहकार टीम उसके सामने सिर झुकाने लगी। ठेकेदार बंदरों ने जंगल के रास्तों को तोड़-मरोड़कर नई सड़कें बनाईं, और साँपों ने नदियों का रुख मोड़ दिया—हर कदम पर रंगीन चालक की जेब भरी जा रही थी। प्राणी सोचने लगे, “क्या जंगल अब इस ठग के हाथों की कठपुतली बन गया है?” स्वर्णमयी की चुप्पी ने सारे सवालों को दबा दिया, और उसकी जादुई कलम, जो कभी जंगल की रक्षा करती थी, अब जंग खाने लगी।
एक दिन, जंगल के छोटे-छोटे खरगोशों ने हिम्मत जुटाई और स्वर्णमयी के पास गए। उन्होंने कहा, “रानी, आपकी कलम क्यों नहीं जागती? यह रंगीन चालक हमारा सोना लूट रहा है!” स्वर्णमयी ने गहरी सांस ली और कहा, “मेरी कलम तभी जागेगी, जब सच्चाई का सूरज उगेगा।” लेकिन खरगोशों को शक हुआ—क्या यह चुप्पी सच्चाई छुपाने का बहाना है, या फिर रंगीन चालक के साथ कोई गुप्त सौदा?
जंगल की हवा अब रहस्य से भरी थी। रंगीन चालक ने अपनी पतंग को और ऊंचा उड़ाया, और उसकी चमक से जंगल के प्राणी अंधे होने लगे। स्वर्णमयी की सभा में हलचल मची, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। खरगोशों ने तय किया कि वे खुद सच्चाई का पीछा करेंगे। उन्होंने जंगल की गुफाओं में छिपे सिक्कों के ढेर देखे और ठेकेदारों की चाल पकड़ी। लेकिन जब वे स्वर्णमयी के पास गए, तो पाया कि उनकी जादुई कलम अब एक कोने में धूल खा रही थी—शायद सिक्कों की चमक ने उसकी स्याही सूखा दी थी!
अब जंगल के प्राणी कहते हैं, “सवाल बेकार, जवाब बेकार, और जंगल? वह तो रंगीन चालक के तमाशे का रंगमंच बन गया है!” स्वर्णमयी की चुप्पी और चालक की धमक ने एक ऐसी कहानी रची, जो हंसी और आश्चर्य से भरी है। क्या खरगोश सच्चाई उजागर करेंगे? क्या जादुई कलम फिर से जागेगी? यह रहस्य अभी भी जंगल की हवा में तैर रहा है, और प्राणी इंतजार कर रहे हैं—कब खुलेगा यह जादुई पर्दा!
विशेष टीप: इस घटना, कथानक तथा इसमें वर्णित सभी पात्र, स्थान एवं संस्थाएँ पूर्णतः काल्पनिक हैं। इनका संबंध किसी भी वास्तविक व्यक्ति, जिला पंचायत, या घटना से नहीं है। यदि यहाँ वर्णित किसी पात्र, स्थान या प्रसंग से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो वह केवल संयोग मात्र होगा। इसका उद्देश्य किसी का अपमान, तिरस्कार अथवा किसी समुदाय के दृष्टिकोण को आहत करना नहीं है।
चुनेश साहू 7049466638





