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मनरेगा योजना से कुंआ निर्माण से कमलेश बना आत्मनिर्भर‘‘

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’’ मनरेगा योजना से कुंआ निर्माण से कमलेश बना आत्मनिर्भर‘‘

 

     ग्राम पंचायत दरगहन एक मध्यम आकार का गाँव है, इसके 03 आश्रित ग्राम है दरगहन, दानीटोला एवं डोकला जो बालोद जिले, छत्तीसगढ़ के गुरुर तहसील में स्थित है, 

 

गांव में खेती-किसानी का रकबा काफी होने के बाद भी पानी की कमी के कारण किसान पर्याप्त फसल नहीं ले पाते हैं। ग्राम सभा के माध्यम महात्मा गांधी नरेगा के तहत कुंआ के निर्माण के संबंध में जानकारी ग्रामीणों को दी गई। इसके तहत बताया गया कि कुंआ निर्माण होने से बारिश के पानी को संचित किया जा सकता है। इससे जहाँ एक ओर फसल को नमी प्राप्त होती है, वहीं बारिश के मौसम में कम वर्षा या अंतराल के दिनों में फसलों को कुंआ के पानी से बचाया जा सकता है। यह बात ग्रामीणों एवं जॉब कार्डधारी श्री कमलेश कुमार पिता मकुन्द राम को समझ में आ गई। उन्होंने खेतों में लगाई जाने वाली फसल को पानी की कमी से सूखते हुए देखा था। इसलिए अपने खेत में कुंआ बनाने का मन बनाया और आवेदन ग्राम पंचायत में जमा कराया।

 

          ग्राम पंचायत क्षेत्रान्तर्गत भूमिगत जलस्तर में कमी वाला स्थान है, ऐसे में खेतों तक पानी मिलना और लगी फसलों और सॉग-सब्जियों को बचाना मुश्किल हो जाता था। पानी की मुश्किलें और पानी के संसाधनों को जुटाने की आर्थिक समस्या को देखते हुये हितग्राही कमलेश कुमार ने ग्राम सभा में मिली जानकारी के आधार पर अपने खेत में कुंआ बनाने का फैसला लिया। उन्होंने अपने 1 एकड़ 50 डिसमिल खेती के रकबे में से कुछ हिस्सा कुंआ निर्माण के लिए दिया; जिसमें महात्मा गांधी नरेगा से एक कुंआ का निर्माण हुआ। अब उनके पास अपनी फसलों को सूखे से बचाने के लिए खुद का पानी का संसाधन है। कुंआ निर्माण होने से अब वे बाड़ी से अपने परिवार का गुजर-बसर बेहतर कर पा रहे हैं।

         किसानों को कुंआ से जोड़ने को लेकर जो समस्याएँ थी,उनमें उनका खेती का रकबा कम होना और कुंआ में पानी को लेकर थी। ग्राम सभा में सबके सामने कुंआ निर्माण के फायदे और ग्राम पंचायत कार्यालय में किसानों की भ्रांतियों को दूर करने को लेकर की गई कोशिशों का ही नतीजा था कि हितग्राही कमलेश कुमार जैसे किसान अपने खेत में कुंआ निर्माण को लेकर आगे आये।

                श्री कमलेश कुमार ने महात्मा गांधी नरेगा से कुंआ मिलने के बाद, कृषि कार्य के साथ-साथ साग सब्जी उगाकर अपनी आय का दुगुना करने का रास्ता सुझाया। कहावत है कि ’’ एक तीर से दो निशान ’’ सार्थक हुआ। अब सिंचाई एवं आर्थिक मामले में श्री कमलेश कुमार आत्मनिर्भर हो गये हैं।

                  सरपंच ग्राम पंचायत दरगहन ने क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में कंुआ निर्माण कार्य अपनी देखरेख में एवं तकनीकी अधिकारी के मार्गदर्शन में पूर्ण करवाया।

                        इस कुंआ के निर्माण में ग्राम रोजगार सहायक ंश्री हुलेश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इन्होंने ग्राम सभा के अलावा लघु किसानों से मिलकर, उन्हें कुंआ निर्माण के लिए प्रेरित किया। तकनीकी सहायक सुश्री किरण साहू ने जहाँ कुंआ निर्माण के दौरान प्राक्कलनके अनुसार कुंआ निर्माण करने में तकनीकी सहायता प्रदान की, वहीं कुंआ निर्माण के दौरान किसान श्री कमलेश कुमार का समय-समय पर हौसला-अफजाई भी की।

 

                                   श्री कमलेश कुमार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे बेहतर जिंदगी गुजर-बसर कर सकें। हर दिन उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या बनी रही रहती थी। बच्चों की पढ़ाई उनके अन्य खर्चे भी उनके लिए भारी थे, लेकिन जब महात्मा गांधी नरेगा से उनके खेत में कुंआ खोदी गई और उसमें भरपूर पानी मिला तो आर्थिक रूप से बहुत फायदा हुआ। वर्तमान में कमलेश कुमार के पास 1 एकड़ 50 डिसमील जमीन है, जिसमें एक फसल लेता था कुंआ निर्मित होने पश्चात् दो फसल का लाभ ले रहे है । कुंआ के पहले जहां 20 हजार रूपए धान की फसल से प्राप्त करते थे, वहीं कुंआ निर्माण के बाद उनके परिवार ने 70 से 80 हजार रूपए की आय धान, गेहूं,सब्जी-भाजी, आदि से आय प्राप्त की। इससे उनका समाज में रूतबा बढ़ा। आज उन्हें प्रगतिशील कृषक के रूप में गांव में जाना-पहचाना जाता है। दूसरे किसान भी उनकी इस उन्नति का राज जानने के लिए उनके पास आते हैं।

         पहले मैं (हितग्राही श्री कमलेश कुमार) खेती-बाड़ी के लिए सिंचाई करने के लिए पानी की समस्या से परेशान रहता था। साल 2022-23 में ग्राम सभा के माध्यम से ग्राम रोजगार सहायक द्वारा बताया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के जरिये किसान अपनी खेती जमीन पर सिंचाई के साधन के रुप में कुंआ खनवा सकते हैं। यह बात सुनकर मैंने अपना प्रस्ताव ग्राम सभा में दिया। ग्राम पंचायत की मदद से मेरे खेत में कुंआ बन गई। इससे सिंचाई के लिए पानी की समस्या दूर हो। इसके अलावा मुझे कुंआ से फल-फुल से आमदनी में वृद्धि करना आसान हुआ। साथ ही हरी-सब्जियां से लाभान्वित हुआ। मैं महात्मा गांधी नरेगा का बहुत-बहुत आभारी हूं कि मुझे नया विश्वास मिला।

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