
धमतरी, 3 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था और पाठ्य पुस्तकों की अनुपलब्धता को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के धमतरी जिलाध्यक्ष राजा देवांगन ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने स्कूलों में नए सत्र शुरू होने के 15 दिन बीत जाने के बावजूद पाठ्य पुस्तकों की गैर-मौजूदगी को लेकर गहरी चिंता जताई। इस देरी से निजी और शासकीय स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
राजा देवांगन ने बताया कि इस वर्ष कक्षा 1, 2, 3 और 6 के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किए गए हैं, लेकिन नई किताबें अब तक स्कूलों तक नहीं पहुँची हैं। निजी स्कूलों में मजबूरीवश पुरानी किताबों या डिजिटल पीडीएफ के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है, जो शिक्षा की गुणवत्ता को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते हुए कहा कि यह स्थिति सरकार की लापरवाही और असंवेदनशीलता का स्पष्ट प्रमाण है।
प्रेस में छपी खबरों का हवाला देते हुए राजा ने बताया कि रायपुर के डिपो में शिक्षकों को जमीन पर बैठकर पुस्तकें छांटते और स्कैनिंग करते देखा गया है, जो शिक्षा विभाग की अव्यवस्थित कार्यप्रणाली को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक वितरण की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है और निजी स्कूलों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
**शिक्षा मंत्री के खाली पद पर सवाल**
राजा ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कई वर्षों से शिक्षा मंत्री का पद रिक्त है, जो शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा, “बिना शिक्षा मंत्री के शिक्षा विभाग दिशाहीन हो चुका है। यह सरकार बच्चों के भविष्य के प्रति पूरी तरह उदासीन है।”
**एनएसयूआई की माँगें**
एनएसयूआई ने सरकार से निम्नलिखित माँगें की हैं:
– सभी शासकीय और निजी स्कूलों में तत्काल पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
– निजी स्कूलों को भी समान प्राथमिकता के साथ पुस्तक वितरण किया जाए।
– शिक्षा विभाग में जवाबदेही तय की जाए और शिक्षा मंत्री की नियुक्ति शीघ्र हो।
**आंदोलन की चेतावनी**
राजा देवांगन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो एनएसयूआई छात्रहितों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा, “हम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, वरना हमें मजबूरन कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।”
**स्थानीय अभिभावकों में भी आक्रोश**
धमतरी के अभिभावकों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। स्थानीय निवासी रमेश साहू ने कहा, “हम मोटी फीस देकर बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन किताबें न मिलने से उनकी पढ़ाई रुकी हुई है। सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।”
शिक्षा व्यवस्था की इस बदहाली ने एक बार फिर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाती है और छात्रों के हित में क्या कदम उठाए जाते हैं।





