@अजय जांगड़े
कवर्धा।दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों से घिरे सूरज सिंह ठाकुर को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता ने स्वयं कोर्ट में हलफनामा देकर सूरज को निर्दोष बताया और कहा कि उसने सूरज के खिलाफ गलतफहमी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
क्या था मामला?
14 जून को सूरज सिंह ठाकुर को युवती की शिकायत पर दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पीड़िता ने तब सूरज पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और गर्भपात कराने का आरोप लगाया था।
बयान से पलटी पीड़िता
17 जून को युवती ने खुद कोर्ट में दंड प्रक्रिया संहिता 164 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 183 के अंतर्गत दिए गए बयान में कहा कि उसने सूरज पर लगे आरोप झूठे गुस्से और भ्रम में लगाए थे।
उसने यह भी स्पष्ट किया कि सूरज से उसके पारस्परिक प्रेम संबंध थे और मध्य प्रदेश चले जाने के बाद जब संपर्क टूटा और सगाई की अफवाह फैली, तब उसने सूरज को बुलाने के उद्देश्य से शिकायत दर्ज कराई।
जमानत याचिका मंजूर
सूरज के अधिवक्ताओं एमएस परिहार, रवि सिंह परिहार और सत्यम शिवम सुंदरम शुक्ला द्वारा पेश की गई जमानत याचिका 18 जून को न्यायालय ने स्वीकार कर ली और सूरज को राहत दी गई।
अब सवाल ये उठता है…
झूठे केस दर्ज कराने वाली महिलाओं पर कब लगेगा अंकुश?
कई दिन जेल में रहने और समाज में अपमानित होने की सूरज सिंह ठाकुर की भरपाई कौन करेगा?
कानून का दुरुपयोग कर निर्दोषों को फंसाने वालों को कब मिलेगी सजा?
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की बेगुनाही का नहीं, बल्कि उस सामाजिक और कानूनी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है जहां झूठे आरोपों के आधार पर किसी की जिंदगी और साख दांव पर लग जाती है।समाज, प्रशासन और न्याय व्यवस्था को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि जहां महिलाओं को न्याय मिले, वहीं झूठे केस दायर करने वाले भी कानून से न बच पाएं।
:यह समाचार केस से जुड़े दस्तावेज, अदालत में दिए गए बयान एवं अधिवक्ताओं के तर्कों के साथ जारी जजमेंट के आधार पर तैयार किया गया है।






