
पण्डरिया : ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 20 किमी की दुरी पर स्थिति प्रसिद्ध पुरातत्विक स्थल पचराही का छत्तीसगढ़ घूमक्कड़ परिवार के 40 से अधिक सदस्यों ने जो की बिलासपुर, रायपुर, बलौदा बाजार, मुंगेली और अन्य जिले से आये थे उन्होंने इस प्रसिद्ध स्थल का भ्रमण किया व यहाँ पर स्थित संग्रहालय का अवलोकन किया। यहाँ उपस्थित पुरातत्विक अवशेषों को देखकर उनका मन प्रफुल्लित हो गया,उसके बाद बकेला तीर्थ और दत्तराम गुफा पर भी गये, और यहाँ नाइट कैम्प करके ठहरे।
पचराही पुरातात्विक स्थल –
पचराही या सिली पचराही छत्तीसगढ़ राज्य के कबीरधाम (कवर्धा) जिले से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा गांव है। पचराही एक पुरातात्विक स्थल है। यह कस्बा कंकाली टीला के नाम से मशहूर है।
यहाँ पुरातात्विक उत्खनन में प्राचीन मंदिर, बैल, लोहे का चुल्हा सहित कई सिक्के मिले हैं। इससे पचराही पुरातात्विक विशेषताओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर इसका खास स्थान है।
वर्ष 2007 में पुरातत्वविद् एस.एस. यादव और अतुल प्रधान की अगवाई में पचराही में पहली बार खुदाई की गई थी। खुदाई में एरिया क्रमांक-1 से मकान की संरचना एवं कल्चुरी काल का एक सोने का सिक्का मिला जिसमे नक्कड़ देव अंकित है। इस स्थान से श्रीदेव अंकित 7 सोने के सिक्को के अलावा 100 सिक्के प्राप्त हुए है। यहां करीब 84 एकड़ की भूमि है, जिसमे से सिर्फ एक हिस्से में खुदाई हुई है। यहां दस टीले मिले हैं। साथ ही पचराही से लगे बकेला में जैन समाज से जुड़े अवशेष मिले है।
पुरातत्वविद् डॉ. ए.के शर्मा के अनुसार सिली पचराही में खुदाई से इस स्थान का बसाहट, महल एवं व्यपारिक केंद्र होने का प्रमाण मिला है। यहां से मिले शिलालेख सिरपुर से मिलते-जुलते है।
सभी पर्यटन प्रेमियों ने कहा की सरकार को यहाँ मुलभुत सुविधाओं के साथ साथ इस जगह पर ठहरने की समुचित व्यवस्था के साथ साथ स्थल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पर्यटन प्रेमियों में बिपिंद्र बघेल, पृथ्वीराज सिँह,मनोज मिश्रा, प्रदीप चंद्रा, लक्ष्मण बांधेकर, शिव कामले, मोहित, राजतिलक भास्कर, रविन्द्र सिँह, मेघराज साहू, लव साहू, सत्येंद्र प्रताप, सत्यपाल, संतोष, लक्षमी चन्द्रकार, सहित बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमियों ने कबीरधाम जिले के पर्यटन स्थलों की सरहाना की व प्रदेश में पर्यटन के लिहाज से सबसे विविधताओ वाला जिला बताया जहाँ पर्यटन की प्रचूर संभावनाएं बस सरकार को इस और ध्यान देने की जरूरत वर्तमान सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा तो दे दिया अब आने वाला वक़्त बताएगा प्रदेश वासियों व पर्यटन प्रेमियों को इसका कितना लाभ मिलता हैँ।





