
छग/धमतरी
धमतरी जिला के नगर सहित ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से लाल ईंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है। भट्ठों में ईंट पकाने के लिए पेड़ की कटाई भी की जा रही। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि बिजली चोरी और जल स्त्रोतों की बर्बादी भी हो रही है।लेकिन जिम्मेदार विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। कार्रवाई नहीं करने पर सवाल उठ रहें हैं ।जबकि ग्रामीण अंचल में लाल ईंट भट्ठा धड़ल्ले से संचालित हो रहें हैं। प्रतिबंध के बावजूद अवैध लाल ईंट का कारोबार बदस्तूर जारी है, जिससे आसपास का वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। इसके बाद भी खनिज विभाग, राजस्व अमला लाल ईंट भट्ठा को बंद कराने के लिए कोई भी कार्रवाई नहीं कर रही है। क्षेत्र में ज्यादा तादाद वाले कई लाल ईंट भट्ठा संचालित हो रहा है, जबकि लाल ईंट भट्ठा पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इसके बाद भी अवैध रूप से ईंट भट्ठा संचालित किया जा रहा है। अगर खनिज विभाग द्वारा अवैध ईंट भट्ठे पर कार्रवाई की जाती है तो इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध ईट भट्ठे मिलेंगे। लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग केवल खानापूर्ति करने में लगी है।

विभाग की अनदेखी, नहीं हो रही कार्रवाई
नगर से बाहर निकलते ही आसपास के गांवों में ही अवैध रुप से ईंट भट्ठे धधक रहे हैं। इसके बाद भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अंदरुनी गांवों में ईंट भट्ठा संचालित करने वाले ठेकेदार तो बेखौफ होकर अपने धंधे को अंजाम दे रहें हैं। कार्रवाई नहीं होने से ईंट बनाने वालों के हौसले बुलंद है।

खुलेआम कर रहे बिजली की चोरी
क्षेत्र के ईंट भट्ठों में खुलेआम चोरी की बिजली जल रही है, तो कहीं-कहीं पर चोरी की बिजली लाइन से भट्ठों में रोशनी चौंधिया रही है। इसी तरह बिजली विभाग व्दारा अस्थायी कनेक्शन भी दिया गया है। विद्युत विभाग के अधिकारी भी इन पर खूब मेहरबान हैं। यही वजह है कि इन्हें देखने तक नहीं पहुंच रहे हैं।
नियमों को दरकिनार कर हो रहा है ईंट भट्ठा संचालित
वायु को प्रदूषित करने और जमीन की उर्वरा शक्ति को कम करने में ईंट भट्ठा महती भूमिका निभा रहे हैं। प्रदूषण न फैलाए इसके लिए इनके संचालन का नियम काफी सख्त रखा गया है। ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बगैर पर्यावरण सर्टिफिकेट के ईंट भट्टों के संचालन पर रोक लगा रखी है। सख्ती के बावजूद ईंट संचालक न पर्यावरण की चिंता कर रहे हैं और न ही सामाजिक सरोकार का निर्वहन किया जा रहा है। जिला स्तर तक के अधिकारियों का उदासीन रहना संदेह के घेरे में है।
ईंट चलाने के नियम में
आबादी से 200 मीटर दूर होना चाहिए , मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी है, पर्यावरण लाइसेंस व प्रदूषण विभाग से एनओसी जारी होनी चाहिए। ईंट चलाने के लिए जिला पंचायत, प्रदूषण विभाग और पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना जरूरी है। तय रहता है प्रदूषण का मानक एक ईंट भट्ठा से सामान्यत: 750 एसएमपी तक प्रदूषण होता है। इसको कम करने की कवायद जारी है। नई टेक्नोलॉजी से प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में स्थित सभी ईंट भ_ों को नई टेक्नोलॉजी से हाई ड्राफ्ट बनाने के निर्देश दिए थे। इनमें कोयले से पका कर ईंट बनाई जाती हैं जिससे सफेद धुआं आसमान में जाएगा और हाई ड्राफ्ट फैन कोयले की राख बनाएगा। इस विधि से भ_ा लगाने से हवा में केवल 250 एसएमपी तक प्रदूषण रह जाएगा।
बहरहाल अब तक यह मामला खनिज विभाग के संज्ञान में आने के बावजूद निष्क्रिय स्वरूप देखा जा रहा है जिससे लोग अब विभाग की संलिप्त होने का आरोप लगा रहे हैं।
चुनेश साहू 7049466638





