कवर्धा, छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री शहरी स्वास्थ्य योजना के तहत डॉक्टरों की मनमानी और तानाशाही सामने आई है। एक डॉक्टर ने विधायक और कलेक्टर को चुनौती देते हुए कहा कि वे उनका कुछ नहीं कर सकते, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया है। जिसका प्रमुख कारण उनको दवा व उपचार न करते हुए बहस और भय नामक शब्दो से बात करते हैं।
कबीरधाम जिले के पंडरिया नगर पालिका क्षेत्र वार्ड 2 में शहरी स्लम योजना के वाहन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में बीपी और शुगर के मरीजों के परिजनों से जानकारी लेने पर डॉक्टर ने कहा कि वे लिखित में कोई जानकारी नहीं देंगे। जब इसकी शिकायत करने को कहा गया तो डॉक्टर ने विधायक से बात करने को कहा और कहा, “विधायक से बात करो और कलेक्टर से भी कहो, वे मुझे कुछ नहीं कर सकते।”
लोगों का कहना है कि ऐसे डॉक्टर को बर्खास्त कर दंडनीय कार्यवाही की जानी चाहिए जो विधायक और कलेक्टर को चुनौती देता है और लोगों का इलाज करने के बजाय राजनीति और वकालत करता है।
इस मामले में विधायक और कलेक्टर से जवाबदेही की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी डॉक्टर इस तरह की मनमानी न कर सके।
छत्तीसगढ़ सरकार की स्वास्थ्य योजना का मकसद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, लेकिन ऐसे डॉक्टरों की मनमानी से इस योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
अब लोगों की निगाहें विधायक और कलेक्टर पर हैं कि वे इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में न्याय होगा और ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।