कवर्धा: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की डिजिटल सदस्यता अभियान, जो पांच साल पहले मिस कॉल के माध्यम से शुरू किया गया था, अब सवालों के घेरे में है। सदस्यों को आज तक कोई सक्रियता नहीं मिली है, और पार्टी में चमचों और दलालों का भरमार हो गया है।
भाजपा के दावे के विपरीत, सदस्यता अभियान में जुड़े लोगों को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है। पार्टी की दिखावे की सदस्यता जनसंख्या वृद्धि में दिखावटी करने के लिए की जा रही है, और लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा की डिजिटल सदस्यता अभियान वास्तव में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए शुरू किया गया था, या यह सिर्फ एक दिखावा है? क्या पार्टी को अपनी सदस्यता अभियान को वास्तविक बनाने की जरूरत नहीं है?
सदस्यता और चमचों का भरमार!
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की डिजिटल सदस्यता अभियान, जो पिछले 6 साल पहले मिस कॉल के माध्यम से शुरू किया गया था, अब सवालों के घेरे में है। सदस्यों को आज तक कोई सक्रियता नहीं मिली है, और पार्टी में चमचों और दलालों का भरमार हो गया है।
भाजपा के दावे के विपरीत, सदस्यता अभियान में जुड़े लोगों को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है। पार्टी की दिखावे की सदस्यता जनसंख्या वृद्धि में दिखावटी करने के लिए की जा रही है, और लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा की डिजिटल सदस्यता अभियान वास्तव में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए शुरू किया गया था, या यह सिर्फ एक दिखावा है? क्या पार्टी को अपनी सदस्यता अभियान को वास्तविक बनाने की जरूरत नहीं है?
जानकारी के अभाव में नए युवा पीढ़ी जोश और भोले पन में डिजिटल सदस्यता तो ग्रहण कर लेते हैं पर उनको किसी भी प्रकार का पार्टी सहयोग और जानकारी प्राप्त नहीं होता है जो भारतीय जनता पार्टी के लिए कलंक के समान है।