
छत्तीसगढ़ /धमतरी _
केन्द्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से निः शक्त को सशक्त बनाने समावेशी शिक्षा की शुरुआत किया गया,समावेशी शिक्षा ऐसी शिक्षा प्रणाली हैं जहा एक सामान्य छात्र एक दिव्यांग छात्र के साथ विद्यालय में अधिकतर समय बिताता है। शिक्षा का समावेशीकरण यह बताता है कि विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक सामान्य छात्र और एक दिव्यांग को समान शिक्षा प्राप्ति के अवसर मिलने चाहिए।

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अंतर्गत समावेशी शिक्षा योजना से दिव्यांग बच्चों का तस्वीर बदल रही हैं, धमतरी स्थित बीआरसी कार्यलय में लगभग 20 दिव्यांग बच्चें समावेशी शिक्षा के तहत कर्यालय आकर पढ़ाई कर रहे हैं, जिन्हे फिजियोथैरेपी और स्पीचथेरेपी के माध्यम से पढ़ाया और सिखाए जा रहे हैं, जिससे बच्चों को सामान्य चीजों को समझने में आसानी हो रहा है।

ऐसे दिव्यांग बच्चें जो समावेशी शिक्षा कार्यलय पहुंच नहीं पाते उन्हें बच्चों के घर जाकर फिजियोथैरेपी और स्पीचथेरेपी दिया जा रहा है, साथ ही घर में बच्चों के पालक भी सिखा सके इसके लिए विभाग द्वारा उन्हें सहायक सामग्रियां और ट्रेनिग भी उपलब्ध कराई जा रही है, ट्रेनिंग में फिजियोथेरेपी के लिए डॉ. नम्रता लाल, स्पीच थेरेपी के लिए सुमन लता साहू एवम ब्लॉक रिसोर्स पर्सन के रुप में उत्तम कुमार साहू ट्रेनर के रुप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

दिव्यांग बच्चों को समान शिक्षा मिलता देख और बच्चों में सुधार आते देख पालक भी अपने बच्चों का कार्यलय उपस्थिति दिला रहे हैं, साथ ही सरकार द्वारा चलाए जा रहे योजना का प्रशंसा भी कर रहे है,

पंकज रावटे, APCऐसे दिव्यांग बच्चें जो सामान्य बच्चों की तरह पढ़ लिख नही पाते उन्हें समावेशी शिक्षा के तहत मिल रहे शिक्षा के माध्यम से शिक्षा मिल सके इसके लिए और भी प्रचार प्रसार की जरूरत है, जिनके लिए पालकों में और भी जागरुकता की आवश्यकता हैं, जिससे शासन द्वारा चलाए जा रहे इस योजना से ज्यादा से ज्यादा बच्चें लाभान्वित हो सकें ।

चुनेश साहू 7049466638





