
छग/ रायपुर
केन्द्र सरकार द्वारा गरीबों के उत्थान और जीवन स्तर में सुधार हेतू अनेक योजनाओं का संचालन करती है , शहर गांव के अंतिम व्यक्ति तक योजना को अमलीजामा पहनाने को कई रणनीतियां तैयार करती है लेकिन कुछ लापरवाह और गैर जिम्मेदार लालची अधिकारीयों का योजनाओं में हेर फेर करने के चलते ग्रामीण जीवन स्तर में गिरावट ही देखी जा रही है।
बहुत पुरानी एक कहावत चरितार्थ हुई जिसमें
अंधेर नगरी में चौपट राजा… टके सेर भाजी… टके सेर खाजा…यह भारत का पहला हिदी नाटक है, जो 1881 में लिखा गया था और जिस दिन यह नाटक लिखा गया, उसी दिन ही इसको पेश भी किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि राज-सत्ता और प्रबंधन पर अपने तीखे व्यंग्य की पेशकारी के साथ यह नाटक आज भी उतना ही सार्थक है।
हिंदी कहावत ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का अर्थ क्या है? राजा, सुगठित प्रशासन और न्याय के लिए जाने जाते रहे हैं. जिस राज्य का राजा बिना विवेक के, बिना विचार के, बिना उचित न्य्याय के, बिना देश हित को सोच कर कार्य करता है वह चौपट राजा कहलाता है.

अर्थात् जो जिम्मेदार अधिकारी है वो सब मामले को जानते हुए अनियमितता में संलिप्त अधिकारी को संरक्षण प्रदान कर बचाने के लिए एड़ी चोटी का दम स्वयं सक्षम अधिकारी कार्य को सुचारू रूप से कर रहे हैं, जिसमें खुद का विवेक, उचित न्याय करने गवाही नहीं दे रहा।
पुरा मामला केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना वर्ष 2021-22 में तत्कालीन सहायक संचालक मछली पालन के कार्यकाल में कुल 162 एवं 70 केज यूनिट लगाने के नाम से आबंटन प्राप्त हुआ था। अधिकांश लोगों को लाभ पहुंचाने की बजाय केवल चार हितग्राहियों को 72 केज राशि 86.40 लाख एवं नौ हितग्राहियों को 162 केज अनुदान राशि 291.60 लाख बीना केज लगे ही कमीशन लेकर बांट दिया गया। वर्तमान स्थिति की बात करें तो गंगरेल बांध में योजना अनुरूप केज नहीं लगे हैं।
वहीं अधिकरी द्वारा संलिप्त को बचाने समय पर समय दिए पड़े हैं जिससे अधिकारी के हौसले बुलंद हैं और ज्यों न हो..?.?.?. वहीं गुप्त सूत्रों की माने तो स्वयं सक्षम अधिकारी की भी स्पष्ट संलिप्तता सामने आ रही है जो की कार्यवाही करने से डर रहें हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रालय भारत सरकार ने जिम्मेदार और सक्षम अधिकारी को कार्यवाही और रिकवरी कर रिपोर्ट से अवगत कराने निर्देश दिए हैं।
वहीं संचालक महोदय द्वारा भ्रष्ट अधिकारी को बचाने की साख दांव पर लगा रहे हैं जो पन्द्रह दिवस में कार्यवाही की बात किए थे उनको समय दिए लगभग दूसरा महीना बीत जाने को है।
बहरहाल यह तो साफ तौर पर स्पष्ट है कि कहीं न कहीं उच्च जिम्मेदार अधिकारी भी संलिप्त हैं जो केंद्रीय मंत्रालय भारत सरकार आदेश बावजूद कान में तेल रुई डाल कर आंख मूंद आराम फरमा रहा है, बड़े ही सोचनीय विषय है ..?.?.??.?
खैर अब मामले को सांठगांठ होता देख प्रार्थी पुलिसिया कार्रवाई और सचिवालय समेत दिल्ली केन्द्रीय मंत्रालय का रुख करने के संकेत दिए हैं देखना होगा संचालक द्वारा क्या कदम उठाए जाते है।
चुनेश साहू 7049466638





